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MP: 'जलसंकट' से जूझ रहे इस गांव की महिलाओं ने छोड़ दिए बच्चे और ससुराल

गर्मी का पारा चढ़ते ही प्रदेश में सूखे की मार से पेयजल की समस्या गहराने लगी है.

MP: 'जलसंकट' से जूझ रहे इस गांव की महिलाओं ने छोड़ दिए बच्चे और ससुराल
टीकमगढ़ जिले के बछौड़ा गांव में रहने वाले पुरुषों की पत्नियां गांव में पानी की कमी के कारण अपने परिवार को छोड़ कर चली गई हैं.

नई दिल्ली/टीकमगढ़: गर्मी का पारा चढ़ते ही प्रदेश में सूखे की मार से पेयजल की समस्या गहराने लगी है. प्रदेश के कई हिस्सों में लोग रोज ही इस समस्या से दो-चार होते हैं. सूखे से जूझ रहे मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड क्षेत्र के टीकमगढ़ जिले का एक ऐसा गांव जहां पानी की किल्लत के चलते गांव की महिलाएं अपनी ससुराल छोड़कर मायके चली गई हैं.

Madhya Pradesh Ladies Left Village And Children Because Of Water Crisis In Tikamgarh

जी हां, सूखे की मार झेल रहे टीकमगढ़ जिले के बछौड़ा गांव में रहने वाले पुरुषों की पत्नियां गांव में पानी की कमी के कारण अपने परिवार को छोड़ कर चली गई हैं. गांव की कुछ महिलाएं, तो अपने दुधमुंहे बच्चों को भी छोड़कर चली गई हैं. गांव वालों ने बताया कि गांव की करीब एक दर्जन महिलाएं अपना परिवार छोड़कर चली गई हैं. उन्होंने बताया कि गांव छोड़कर गई महिलाओं का कहना है कि वे गांव में जलसंकट खत्म होने से पहले वापस नहीं आएंगी.

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टीकमगढ़ जिले की पृथ्वीपुर विधानसभा क्षेत्र के बछौड़ा गांव की आबादी 7000 है. इस गांव में ग्रामीणों को पेयजल के लिए अच्छी खासी मशक्कत करनी पड़ती है. ग्रामीणों को पेयजल के लिए गांव से दो किमी दूर जाकर पानी लाना पड़ता है. गांव में पानी का टंकी बनी हुई है, लेकिन खराब है. गांव में हैंडपंप पूरी तरह से सूख चुके हैं.

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गांव की निवासी जमुना बाई ने बताया कि उनकी बहू का कहना है कि जब तक गांव में पानी का संकट है, तब तक वह किसी भी कीमत पर ससुराल नही आएगी. वहीं, नन्ही बाई ने बताया कि पानी लेने के लिए दो किमी जाना पड़ता था, जिसके कारण उनकी बहू अपनी चार महीने की दुधमुंही बच्ची को छोड़कर मायके चली गई. उन्होंने बताया कि घर का सारा काम अब बेटा ही कर रहा है. 

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ग्रामीण भागीरथ बंशकार ने बताया कि गांव के लोगों का बुरा हाल है. सभी को पानी लाने के साथ ही घर का चौका-चूल्हा से लेकर सारे घर के कामकाज करने पड़ते हैं. ग्रामीण कक्कू ने बताया कि पानी लाने और घर के कामों को करने के कारण लोग मजदूरी करने के लिए भी नहीं जा रहे हैं. इसके कारण लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट भी पैदा होता जा रहा है.

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ग्रामीण राजाराम ने बताया कि उसकी पत्नी चार महीने की बच्ची को छोड़ कर चली गई है. जिसके कारण उसे गांव से पलायन करने को मजबूर होना पड़ रहा है. उन्होंने बताया कि गांव के सरपंच से लेकर नलजल विभाग को भी समस्या से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं मिली है. ग्रामीण भूरा बंशकार का कहना है कि जलसंकट के कारण गांव के लोगों के सामने पलायन के अलावा कोई चारा नहीं है. 

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ग्रामीण सुल्तान सिंह ने बताया कि गांव में 20 साल पहले सरकार द्वारा नलजल योजना चालू की गई थी, लेकिन अब इस योजना की टंकी और पाईपलाइन शोपीस बनकर रह गई हैं. उन्होंने कहा कि गांव की समस्या पर किसी जनप्रतिनिधि और शासन-प्रशासन के नुमाइंदे ने ध्यान नहीं दिया. मुन्नी बाई ने बताया कि पीने के पानी के लिए गांव से दो किलोमीटर दूर पॉवर हाउस पर लगे हैंडपंप पर जाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि गांव के बड़े लोगों के घर पर पानी का इंतजाम हो जाता है, लेकिन पिसना गरीब को ही पड़ता है.

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आपको बता दें कि प्रदेश के सीमांत गांवों के हालात ऐसे हैं कि लोग अपने राज्य की सीमा लांघकर दूसरे राज्य के गांव से पानी लाने को मजबूर हैं. वहीं कुछ गांवों में टोकन के माध्यम से पानी बंटा जा रहा है.