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MP की बेटी सरिता चौरे ने इंग्लैंड में लहराया परचम, ब्लाइंड जूडो चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

होशंगाबाद की रहने वाली दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ी सरिता चौरे ने इंग्लैंड की सरजमीं पर होने वाले कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीता है.

MP की बेटी सरिता चौरे ने इंग्लैंड में लहराया परचम, ब्लाइंड जूडो चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक
मध्य प्रदेश के होशंगाबाद की रहने वाली हैं सरिता चौरे

भोपालः भारत की होनहार बेटियां पूरी दुनिया में देश का नाम रोशन कर रही हैं और अब मध्यप्रदेश की एक ऐसी ही होनहार बेटी ने इंग्लैंड में भारत का परचम लहराया है. हम बात कर रहे हैं होशंगाबाद की रहने वाली दृष्टिबाधित जूडो खिलाड़ी सरिता चौरे की, जिसने इंग्लैंड की सरजमीं पर होने वाले कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए कांस्य पदक जीता है. खास बात तो यह है कि सरिता के पिता मजदूरी करते हैं और विपरित हालातों के बीच सरिता इंग्लैंड में जूडो चैंपियनशिप में दमखम दिखा कर देश का नाम रौशन किया है. 

मध्य प्रदेश के होशंगाबाद की रहने वाली सरिता चौरे इंदौर के जीडीसी कॉलेज से बीए की पढ़ाई कर रही हैं. पिता की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि वह बेटी को विदेश भेज सकें, जिसके बाद मध्य प्रदेश शासन ने सरिता को इंग्लैंड जाने में मदद की, जिसके बाद सरिता ने विदेश में भारत का नाम रौशन किया है. बर्मिंघम में 21 सितंबर से दृष्टिबाधित खिलाड़ियों की कॉमनवेल्थ जूडो चैंपियनशिप खेली गई, जिसमें सरिता ने ब्रॉन्ज मैडल हासिल किया है.

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बता दें सरिता ने इससे पहले गोरखपुर में राष्ट्रीय स्पर्धा 48 किग्रा वर्ग में रजत जीत भारतीय टीम में जगह बनाई थी. वे इस चैंपियनशिप के एमपी से जाने वाली तीन महिला खिलाड़ियों में शामिल थीं. हांलाकि होशंगाबाद के छोटे से गांव बांजराकला की रहने वाली सरिता के लिए यहां तक पहुंचने की राह आसान नहीं रही. जन्म से ही दृष्टिबाधित सरिता के पिता बांजराकला में ही मजदूरी करते हैं और अपने आर्थिक तंगी के बीच परिवार का पालन पोषण करते हैं. पिता की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, लेकिन बच्चों के भविष्य को देखते हुए उन्होंने बेटियों को इंदौर पढ़ने के लिए भेज दिया. हैरान कर देने वाली बात यह है कि सरिता की बड़ी बहन ज्योति और छोटी बहन पूजा भी जन्म से ही दृष्टिबाधित हैं.

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सरिता का बचपन से ही जूडो में अपना भविष्य बनाने का सपना रहा है. उन्हें पता लगा कि होशंगाबाद के सुहागपुर तहसील में एक समाजसेवी संस्था दृष्टिबाधित बच्चों को जूडो का प्रशिक्षण देती है. फिर क्या था सरिता ने भी संस्था से जुड़कर जूडो की ट्रेनिंग शुरू कर दी. स्टेट लेवल चैंपियनशिप में दमखम दिखाने के साथ ही उन्होंने गोरखपुर में राष्ट्रीय स्पर्धा 48 किग्रा वर्ग में रजत जीत भारतीय टीम में जगह बनाई.