पुरातात्विक धरोहर पर दो पक्षों का दावा, एक ने स्थापित की मूर्ति, दूसरे ने लगाया झंडा, जानिए पूरा मामला

बैतूल के सालबर्डी इलाके में स्थित पुरातनकालीन गुफा पर विवाद खड़ा हो गया है. यह गुफा महाभारतकालीन मानी जाती है. लेकिन इस गुफा पर आदिवासी समुदाय और  बौद्ध समुदाय के लोगों ने अपना-अपना दावा ठोक दिया, जिसके बाद पूरे मामले में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा.

पुरातात्विक धरोहर पर दो पक्षों का दावा, एक ने स्थापित की मूर्ति, दूसरे ने लगाया झंडा, जानिए पूरा मामला
बैतूल जिले के सालबर्डी में स्थित गुफा

बैतूलः मध्य प्रदेश का बैतूल जिला पुरातात्विक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. यहां कई ऐतहासिक धरोहरें मौजूद हैं. लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते कई पुरातात्विक धरोहरों की अनदेखी हो रही है. हालत यह है की ऐसी धरोहरों पर अब लोग अपना-अपना दावा ठोक रहे हैं. बैतूल के सालबर्डी इलाके में स्थित पुरातनकालीन गुफा पर विवाद खड़ा हो गया है. यह गुफा महाभारतकालीन मानी जाती है. लेकिन आदिवासी और बौद्ध समुदाय के लोगों ने इस गुफा को अपनी-अपनी संस्कृति से जोड़कर विवादित बना दिया है. जहां बौद्ध समुदाय से जुड़ा एक तबका इसे बौद्धकाल की गुफा बताकर अपनी धरोहर बता रहा है, तो वहीं आदिवासी समुदाय ने इसे अपने पुरखों की विरासत होने का दावा ठोक कर इस पर अपना हक जताया है.

झंडा और मूर्ति बनी विवाद की वजह
8 अगस्त 2020 में आदिवासी समुदाय से जुड़े कुछ संगठनों ने गुफा पर पीला झंडा लगाकर इसे आदिवासी राजाओं की विरासत होने का दावा किया था. तो बीते 7 जनवरी 2021 को गुफा में एक बौद्ध प्रतिमा रखकर बौद्ध समुदाय ने इसे बौद्धकालीन बताकर अपना हक जताया है. जिससे यहां दोनों समुदाय के बीच विवाद की स्थिति बन गयी. लिहाजा बढ़ते विवाद के बाद इस मामले में प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा है.

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दोनों समुदाय के अपने-अपने दावे

आदिवासी लोगों का दावा
आदिवासी समुदाय से जुड़े और आठनेर जनपद पंचायत के अध्यक्ष राम चरण इडपाचें का दावा है कि उस गुफा में गोंडवाना राज्य कालीन राज्य का चिह्न है. उससे साबित होता है कि यह गोंडवाना राजा की विरासत है. इस गुफा का निर्माण भी गोंड राजाओं ने ही करवाया था. रामचरण के मुताबिक गोंडकालीन इतिहासकार मोती रावण कंगाली रचित किताब में सालबर्डी का नाम जिसे उसवक्त सल्लेबर्डी कहा जाता था.  उस स्थान पर शंभू-गौरा का मंदिर था. इस बात के बहुत सारे प्रमाण है और किताबों में भी लिखा है जिससे हमारा दावा है कि यह गुफा गोंड राजाओं की विरासत है. पर हमने कभी इसमें हस्तक्षेप नहीं किया. लेकिन जब यहां कुछ लोगों ने बौद्ध भगवान की स्थापना कर दी जो कि गलत है. रामचरण का कहना है कि जो पुरातात्विक धरोहर है उसे वैसे का वैसा ही रखा जाए.

बौद्ध धर्म के लोगों का दावा
वही गुफा को लेकर जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय बैतूल के प्रोफेसर डॉ. सुखदेव डोंगरे के अनुसार सालबर्डी में 5वीं शताब्दी में बनी तीन बौद्धकालीन गुफाएं हैं. दो बौद्ध गुफा विकसित है. जबकि एक पूरी तरह से नहीं बनी है. इनमें से एक गुफा पर महानुभव पंथियों द्वारा कब्जा कर लिया गया है. सालबर्डी  में बनी इन तीनों गुफाओं के आस-पास पद्मपानी एवं वज्रपानी बुद्ध भगवान की मूर्तियां मौजूद हैं. जिससे यह साबित होता है कि यह गुफा भी बौद्धकालीन गुफा है. लेकिन इस गुफा पर महानुभव सम्प्रदाय कब्जा करने की कोशिश कर यहां पर मौजूद मूर्तियों को खंडित करने में लगा है.

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SDM ने बुलाई दोनों समुदाय की बैठक  
विवाद के बाद 15 जनवरी को मुलताई तहसील की एसडीएम हर्ष सिमरन कौर ने दोनों पक्षों की बैठक बुलाई. एसडीएम ने दोनों पक्षों को समझाकर इस गुफा को पुरातात्विक धरोहर बताया. जिसके बाद दोनों पक्ष अपना कब्जा और दावा छोड़ने पर राजी  हो गए है. जिसके बाद गुफा से मूर्ति और झंडा हटाए जाने के लिए भी दोनों पक्ष राजी हो गए. लेकिन इस पूरे मामले में पुरातत्व विभाग की लापरवाही जाहिर हुई है. क्योंकि इस गुफा पर ध्यान न दिए जाने की वजह से दोनों समुदाय के लोगों ने इस पर अपना-अपना दावा करना शुरू कर दिया था.

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