मध्य प्रदेश: ओडीएफ घोषित जिले में महिलाएं 'लोटा' लेकर पहुंची कलेक्टर ऑफिस

मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में खुले में शौचमुक्त योजना केवल कागजों पर ही नजर आ रही है.

मध्य प्रदेश: ओडीएफ घोषित जिले में महिलाएं 'लोटा' लेकर पहुंची कलेक्टर ऑफिस
ओडीएफ घोषित होने का बाद भी यहां शौचालय की मांग को लेकर गुरुवार को महिलाओं ने प्रदर्शन किया.

विदिशा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान के तहत घर-घर शौचालय बनवाने के लिए प्रदेश सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं. इस अभियान के चलते महिलाओं को सम्मान तो मिला ही है. साथ ही महिलाओं में शौचालय को लेकर जागरुकता भी बढ़ी है. देश भर में कई लोगों को इस योजना के अंतर्गत लाभ मिला. कई जिलों के ओडीएफ (खुले में शौचमुक्त) भी घोषित किया जा चुका है. वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में ये योजना केवल कागजों पर ही नजर आ रही है. ओडीएफ घोषित होने का बाद भी यहां शौचालय की मांग को लेकर गुरुवार को महिलाओं ने प्रदर्शन किया.

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अपनाया विरोध का अनोखा तरीका
महिलाओं ने विरोध का एक अनोखा तरीका पेश किया. जिले की सैकड़ों महिलाएं शौचालय की मांग को लेकर हाथ मे 'लोटा' लिए सड़कों से सीधा कलेक्टर ऑफिस पहुंची. महिलाओं ने शौचालय की मांग करते हुए खूब नारेबाजी की. महिलाओं ने बताया कि उन्हें को हर दिन शौचालय के लिए रेलवे लाइन पर जाना पड़ता है. इस कारण उन्हें परेशानी के साथ शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि रेलवे अधिकारी कई बार फाइन भी कर चुके हैं. आपको ये जानकर हैरत होगी कि 31 मार्च को पूरे जिले को ओडीएफ घोषित किया जा चुका है. महिलाओं ने कई घंटों तक कलेक्टर ऑफिस का घेराव किया, लेकिन केवल कार्रवाई का आश्वासन ही मिला.

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जिला घोषित हो चुका है ओडीएफ
विदिशा जिले को 31 मार्च को ओडीएफ घोषित कर दिया गया था. जिला प्रशासन इसे लेकर अपनी पीठ थपथपाने में लगा है. लेकिन ओडीएफ घोषित जिले में सैकड़ों महिलाएं हाथ मे लोटा लिए नारेबाजी करती हुईं कलेक्टर ऑफिस पहुंची और शौचालय की मांग की. महिलाओं ने बताया कि घरों में शौचालय नही होने के कारण महिलाओं को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि यह हमारा हक है. वहीं ओडीएफ घोषित जिले के विषय में जब जिला पंचायत सीईओ दीपक आर्य से सवाल किया गया तो, उन्होंने कहा कि मुझे ग्रामीण इलाके की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा कि शहर में ऐसी कोई समस्या नहीं है. महिलाओं को आश्वासन देकर वहां से हटा दिया गया. लेकिन सवाल अब भी वही है कि क्या विदिशा केवल कागजों पर ही ओडीएफ घोषित हुआ है.