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पर्यटकों के लिए अबूझ पहेली है छत्तीसगढ़ का यह टूरिस्ट प्लेस, जरा सा उछलो तो हिलने लगती है जमीन

छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, अतुल्य कलाकृतियों और पर्यटन की अपार संभावनाओं के लिए जाना जाता है. वैसे तो इसे नक्सल का गढ़ कहा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसी कई जगहे हैं जो कि पर्यटकों और घूमने के शौकीनों की पहली पसंद बनी हुई है.

पर्यटकों के लिए अबूझ पहेली है छत्तीसगढ़ का यह टूरिस्ट प्लेस, जरा सा उछलो तो हिलने लगती है जमीन
(फोटो साभारः twitter)

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता, अतुल्य कलाकृतियों और पर्यटन की अपार संभावनाओं के लिए जाना जाता है. वैसे तो इसे नक्सल का गढ़ कहा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसी कई जगहे हैं जो कि पर्यटकों और घूमने के शौकीनों की पहली पसंद बनी हुई है. चित्रकोट जलप्रपात से लेकर मैनपाट की बाउंसिंग जमीन तक सभी छत्तीसगढ़ की शान हैं. शहरी कोलाहल से दूर ये जगहें धरती पर जन्नत का एहसास दिलाती हैं. बता दें छत्तीसगढ़ में एक ऐसी भी जगह है जहां बर्फबारी होती है. तभी तो इस जगह को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है. यह जगह है मैनपाट. मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता और खूबसूरती की वजह से आज-कल यह सैलानियों की पहली पसंद बना हुआ है. जहां एक ओर सर्दियों के मौसम में यह शिमला की याद दिलाता है तो वहीं यहां की स्पंजी जमीन के पीछे का कारण आज भी लोगों के लिए एक सवाल ही बना हुआ है. 

स्थानीय लोगों को जमीन के स्पंजी होने का राज आज तक पता नहीं चल पाया है. उनसे जब इसकी वजह पूछो तो वह भी सोच में पड़ जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों का मानना है कि यहां कभी कोई जलस्त्रोत रहा होगा. जिसकी जमीन ऊपर से सूखती जा रही है, लेकिन जमीन के नीचे आज भी पानी मौजूद है. यहां पहुंचने वाले लोग जोरों से जमीन पर उछल-उछल कर फोटो खिंचवाते हैं और इस स्पंजी जमीन का मजा लेते हैं.

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छत्तीसगढ़ी और तिब्बति संस्कृति का संगम 
सर्दियों में मैनपाट कुछ ऐसा दिखाई देता है मानो पूरा क्षेत्र बर्फ से ढक गया हो. सर्दियों के मौसम में यह शिमला की ही तरह बर्फ से ढक जाता है. ऐसे में यहां कई सैलानी इसकी खूबसूरती देखने पहुंचते हैं. बता दें 1959 में तिब्ब्त पर चीन के कब्जे के बाद कुछ तिब्बती यहीं आकर बस गए थे. अब इन तिब्बतियों ने मैनपाट को ही अपना घर बना लिया है. इसीलिए छत्तीसगढ़ी के साथ ही यहां तिब्बति संस्कृति भी यहां देखने को मिलती है. 

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छत्तीसगढ़ का मिनी तिब्बत
तिब्बतियों के बसे होने की वजह से यहां के मठ-मंदिर, खान-पान और संस्कृति में भी तिब्बत जैसा महसूस होता है. यही कारण है कि इसे छत्तीसगढ़ का शिमला के साथ ही मिनी तिब्बत कहा जाता है. मैनपाट का मौसम भी हमेशा ही खुशनुमा रहता है. खासकर सर्दियों और बारिश के मौसम में यहां की खूबसूरती देखने लायक होती है. मैनपाट की सड़कें घुमावदार होने के साथ ही छटलनभरी भी होती हैं. क्योंकि यहां अक्सर हल्की फुहारें पड़ती रहती हैं. यहां कई बार तो दिन में भी गाड़ियों की लाइट जलाने की जरूरत पड़ जाती है. क्योंकि यहां दिन में भी कोहरा छाया रहता है. शहरी तनाव, हल्ला, प्रदूषण और भागमभाग से दूर मैनपाट का प्राकृतिक सौंदर्य और यहां की खूबसूरती लोगों को काफी आकर्षित करती है.