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छत्तीसगढ़: बच्चों की पढ़ाई को लगा 'रोग', तबादला होते ही 'टीचर' पड़े बीमार

हाल ही में छत्तीसगढ़ में भारी संख्या में शिक्षकों के तबादले हुए हैं. इनमें सैकड़ों मे संख्या ऐसे शिक्षकों और अधिकारियों की है, जो अपनी वर्तमान पदस्थापना को नही छोड़ना चाह रहे हैं. 

छत्तीसगढ़: बच्चों की पढ़ाई को लगा 'रोग', तबादला होते ही 'टीचर' पड़े बीमार
माहौल गरम हो और राजनीति न हो, भला ऐसा कैसे हो सकता है. कर्मचारियों की सेहत सुधारने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही मैदान मे आ गये. (प्रतीकात्मक फोटो)

वैभव शर्मा/रायपुर: छत्तीसगढ़ आदिवासी बाहुल्य राज्य है, ऐसे मे ये जरुरी हो जाता है कि यहां की साक्षरता और शिक्षा व्यवस्था पर खासा जोर दिया जाए. लेकिन, राज्य में फिलहाल जो हालात बन रहे हैं, उनसे ये लगता नही है कि यहां कुछ बेहतर हो सकने वाला है. दरअसल, हम ये बात इसलिए कह रहे हैं कि ज्ञान का दिया जलाने वाले गुरुजी अभी बीमार है और उन्हें जो बीमारी लगी है उसका नाम शायद "होम सिकनेस" ही कहा जाएगा. बता दें कि होम सिकनेस का मतलब घर से बाहर निकलने पर होने वाला चिड़चिड़ापन है.

हाल ही में छत्तीसगढ़ में भारी संख्या में शिक्षकों के तबादले हुए हैं. इनमें सैकड़ों मे संख्या ऐसे शिक्षकों और अधिकारियों की है, जो अपनी वर्तमान पदस्थापना को नही छोड़ना चाह रहे हैं. इसलिए मेडिकल लीव लगाकर लंबी छुट्टी पर चले गये हैं. वहीं, गुरुजी का अभी से छुट्टी पर चले जाना बच्चों की पढ़ाई पर भारी पड़ रहा है. कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एक या दो शिक्षक ही हैं और उस पर उनका छुट्टी पर चले जाना खुद ही समझा जा सकता है. हालांकि, शिक्षक अकेले हैं ऐसा नही है, उनकी वकालत करने वाले संगठन हमेशा उन्हें बैक सपोर्ट देते आये हैं और अभी भी दे रहे हैं.

 

शिक्षाकर्मी संघ के संयोजक वीरेंद्र दुबे ने तो ट्रांसफर की अलग से नीति और समय भी बता दिया है. उन्होंने कहा कि लगभग 40 हजार आवेदन तबादले के लिए लगे हैं लेकिन, सरकार पति-पत्नी को जुदा कर रही है और दुर्भावना से ट्रांसफर कर रही है. दुर्भाग्य की बात है कि जो ट्रांसफर चाह रहे हैं, उनका नही हो रहा और जो नही चाह रहे हैं उनका जबरन किया जा रहा है. साथ ही उन्होंने कहा कि दुर्भावना से शिक्षकों का ट्रांसफर किया जायेगा तो उनमें आक्रोश बढ़ेगा.

वहीं, माहौल गरम हो और राजनीति न हो, भला ऐसा कैसे हो सकता है. कर्मचारियों की सेहत सुधारने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही मैदान मे आ गये. बीजेपी आरोप लगा रही है कि ये सरकार का तुलगकी फरमान है. राजनीतिक दवाब मे तबादले किये जा रहे हैं. वहीं, कांग्रेस का कहना है कि बीजेपी को तबादला नीति की समझ नही है और हर शिक्षक को उसकी मनमाफिक जगह भेजना संभव नही है. शिक्षक मनमाफिक जगह नही मिलने से बीमारी का बहाना बना रहे हैं. सियासतदार अपनी राजनीतिक सेहत दुरुस्त करने मे लगे हैं. लेकिन, हकीकत यही है कि स्कूलों मे शिक्षक नही होने से बच्चों की पढ़ाई पर खासा असर है.