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मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र, कर्ज माफी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा

सदन में  शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा उठाया.

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र, कर्ज माफी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा
(फाइल फोटो)

भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन किसानों की कर्ज माफी पर जमकर हंगामा हुआ. सदन में  शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा उठाया. शिवराज ने इस मुद्दें पर सदन में अविलंब चर्चा की मांग की जिस पर आसंदी ने नकार दिया इसके बाद विपक्ष ने आसंदी पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया. इसके बाद सदन से वॉकआउट कर दिया..किसानों की कर्जमाफी को लेकर विपक्ष की लगातार अविलंब चर्चा की मांग और हंगामे के बाद विपक्षी दल के सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए.

शून्यकाल के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में दो लाख रुपए तक की कर्जमाफी की घोषणा की थी, लेकिन सरकार बनने के बाद जारी आदेश में अल्पकालीन ऋण की बात सामने आ गई. अब किसानों को कर्ज के लिए साहूकारों के पास जाना पड़ रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति से अनुरोध किया कि इस मुद्दे को लेकर सदन में स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से बिना देर किए चर्चा कराई जाए.

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि किसानों को बारिश के मौसम में सहकारिता संस्थाओं से खाद-बीज नहीं मिल पा रहे. उन्होंने दावा किया कि उनके पास 12 ऐसे किसानों की सूची है, जिनका ऋण माफ नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं. अध्यक्ष एन पी प्रजापति ने कहा कि उन्हें स्थगन प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और इस विषय पर किसी न किसी रूप में चर्चा कराई जाएगी.

अध्यक्ष के आश्वासन के बाद भी गोपाल भार्गव और शिवराज सिंह चौहान समेत विपक्ष के सदस्य इस मुद्दे पर अविलंब चर्चा कराने पर अड़े रहे और सदन से बहिर्गमन कर दिया. 

सदन के बाहर विपक्ष विधायकों ने जमकर नारेबाजी की विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा  में शिवराज सिंह ने कहा सरकार बने सात महीने हो गए है लेकिन अब तक कर्ज़ माफ नहीं हुआ.

सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है, शिवराज ने सरकार की कर्ज माफी पर सवाल उठाते हुए कहा कि कर्ज माफी के लिए जिस राशि का प्रवाधान किया गया है वह ऊंट के मुंह मे जीरा के समान है.

उन्होंने कहा कि आज किसान परेशान हो गया है. कर्ज नहीं चुकाने के चलते किसान डिफाल्टर हो गए है और बैंक उन्हें कर्ज चुकाने के लिए नोटिस दे रहे है और किसान आज साहूकारों से कर्जा लेने के लिए मजबूर है.

सदन में जब हमने चर्चा की मांग की तो सरकार नहीं मानी इसलिए हमने वॉकआइट किया है. शिवराज ने कहा कि हम सरकार को चेतावनी देते हैं किसानों की समस्या का समाधान करे अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम सड़क पर उतरेंगे.

किसानों के मुद्दे पर चर्चा करवाये सरकार नही तो विधानसभा नही चलने देंगे. वहीं नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मीडिया से चर्चा में  सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार किसान मर्ज माफी पर चर्चा के लिए तैयार नहीं और पूरे मुद्दें पर टालमटोल कर रही है, ऐसे में जब प्रदेश में बारिश विलंब से हुई है ऐसे में किसानों को जो सहायता मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रही है. ऐसे में डर इस बात का है कि इस बार किसान बोनी भी नहीं कर पायेगा या नहीं...उन्होंने किसानों के मुद्दों पर सरकार को पूरी तरह असफल बताया. 

वहीं दूसरी तरफ सरकार के मंत्रियों ने भी विपक्ष पर निशाना साधा. मध्यप्रदेश के जनसंपर्क एवं कानून मंत्री पीसी शर्मा ने किसानों के मुद्दे पर बीजेपी द्वारा सदन से बहिर्गमन करने पर कहा कि जब बीजेपी की सरकार थी तो बीजेपी ने नारा दिया था भाजपा का कहना साफ, हर किसान का कर्जा माफ. 50 हजार तक का कर्ज माफ करने की घोषणा की थी बीजेपी सरकार ने लेकिन कर्ज माफ नही किया. यह किसानों के लिए नही सिर्फ अपनी पब्लिसिटी के लिए कर रहे है ऐसा कर रहे हैं. पीसी शर्मा ने कहा कमलनाथ सरकार वचन की पक्की है किसानों को दिया वचन पूरा करेगी.