मध्यप्रदेश चुनाव 2018: में 'महाराज' और 'घोषणावीर' के बीच चुनावी घमासान

विधानसभा चुनावों के दौरान चेहरों की चुनावी जंग में इस बार "महाराज" और "घोषणावीर" शब्द छाये रहे.

मध्यप्रदेश चुनाव 2018: में 'महाराज' और 'घोषणावीर' के बीच चुनावी घमासान
फाइल फोटो

इंदौरः कांटे की टक्कर वाले मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान चेहरों की चुनावी जंग में इस बार "महाराज" और "घोषणावीर" शब्द छाये रहे. राज्य में लगातार चौथी बार चुनाव जीतने की चुनौती से जूझ रही सत्तारूढ़ भाजपा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ "महाराज" नाम के विपक्षी किरदार को नारों की जमीन पर उतारा. उधर, शिवराज के खिलाफ कोई चुनावी चेहरा घोषित नहीं करने वाली कांग्रेस मुख्यमंत्री को "घोषणावीर" करार देते हुए सूबे की सत्ता से अपना 15 साल पुराना वनवास खत्म करने को एड़ी-चोटी का जोर लगाती देखी गई.

प्रदेश में 28 नवंबर को होने वाले विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रचार अभियान में "माफ़ करो महाराज! हमारा नेता शिवराज" का नारा प्रमुखता से इस्तेमाल किया गया. शिवराज के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी अपनी चुनावी रैलियों के दौरान दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ सरीखे तीन बड़े कांग्रेस नेताओं को इशारों ही इशारों में क्रमश: "राजा", "महाराजा" और "उद्योगपति" कहकर विपक्षी खेमे पर हमला बोला.

यह पूछे जाने पर कि "माफ करो महाराज! हमारा नेता शिवराज" के प्रमुख चुनावी नारे में भाजपा ने "महाराज" के रूप में आखिर किसे संबोधित किया है, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्बित पात्रा ने न्यूज एजेंसी "पीटीआई-भाषा" से कहा, "वैसे तो महाराज आम बोलचाल का शब्द है, लेकिन हमारे चुनावी नारे में प्रयुक्त महाराज शब्द को कांग्रेस की सामंतवादी मानसिकता का प्रतीक माना जा सकता है." 

उधर, "कांग्रेस के साथ वक्त है बदलाव का" का चुनावी नारा देने वाले सूबे के प्रमुख विपक्षी दल ने अपने किसी भी आला नेता को शिवराज के खिलाफ मुख्यमंत्री पद के दावेदार के रूप में घोषित नहीं किया. हालांकि, कांग्रेस के चुनावी विज्ञापनों में कमलनाथ और सिंधिया की तस्वीरें प्रमुखता से दी गयीं जिन्हें इस दल की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में शामिल माना जाता है.

कमलनाथ कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष हैं, जबकि सिंधिया राज्य कांग्रेस चुनाव अभियान समिति के प्रमुख हैं. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के साथ कमलनाथ और सिंधिया ने भी अपने चुनावी भाषणों में शिवराज पर सीधा निशाना साधते हुए उन्हें "घोषणावीर" करार दिया और भाजपा सरकार पर जनता से वादाखिलाफी के आरोप लगाये.

सिंधिया ने यहां हालिया चुनावी रैली में दावा किया कि शिवराज ने मुख्यमंत्री के रूप में 21,000 ऐसी घोषणाएं कीं जिनमें से एक भी जमीन पर नहीं उतर सकी. ग्वालियर के पूर्व राजघराने के उत्तराधिकारी ने सूबे के मुख्यमंत्री से अपनी सीधी तुलना में कहा, "मैं शिवराज की तरह घोषणावीर नहीं हूं." मध्यप्रदेश में वर्ष 2003 के विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा ने अपने अभियान में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ "श्रीमान बंटाधार" शब्द का इस्तेमाल किया था. भाजपा की ओर से इस शब्द का इस्तेमाल राज्य के आसन्न विधानसभा चुनावों में भी किया गया. 

इसके जवाब में मौजूदा मुख्यमंत्री को दिग्विजय की ओर से खुली चुनौती दी गयी, "अगर शिवराज में साहस हो, तो वह कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार के 10 वर्षीय शासन और भाजपा के पिछले 15 साल से जारी राज को लेकर सार्वजनिक मंच पर मुझसे बहस करें."