कांग्रेस के मंत्री बोले- BJP के पास खुरदरे चेहरे, वोट के लिए कराते हैं हेमा मालिनी से डांस

मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर पलटवार किया है.

कांग्रेस के मंत्री बोले- BJP के पास खुरदरे चेहरे, वोट के लिए कराते हैं हेमा मालिनी से डांस
कमलनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा का बीजेपी पर पलटवार.

नई दिल्ली: मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार में कैबिनेट मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के उस बयान पर पलटवार किया है जिसमें बीजेपी नेता ने कहा था कि अगले लोकसभा चुनाव में उतारने के लिए कांग्रेस के पास मजबूत नेता नहीं हैं इसलिए वह 'चॉकलेटी चेहरों' के माध्यम से चुनाव लड़ना चाहती है.

इसको लेकर मंत्री वर्मा ने कहा, ''बीजेपी में खुरदरे चेहरे हैं, ऐसे चेहरे जिनको लोग नापसंद करते हैं. एक हेमा मालिनी हैं, जिनको जगह-जगह शास्त्रीय नृत्य कराते रहते हैं, वोट कमाने की कोशिश करते हैं. चिकने चेहरे उनके पास नहीं हैं.''

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, ''मेरा यह कहना है कि मानव ईश्वर प्रदत्त होता है. अरे सराहना करो कि ईश्वर ने प्रियंका गांधी को इतना सुंदर बनाया है जिससे ममत्व और स्नेह झलकता है. ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करके बीजेपी और कैलाश जी अपनी गरिमा गिरा रहे हैं.''

जानिए, कैलाश ने क्या कहा था
दरअसल, सक्रिय राजनीति में प्रियंका गांधी वाड्रा के प्रवेश पर बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी कांग्रेसी समकक्ष की करीना कपूर और सलमान खान जैसे फिल्मी सितारों से तुलना करते हुए शनिवार को कहा कि कांग्रेस 'चॉकलेटी चेहरों' के बूते अगला लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है.

'चॉकलेटी चेहरों' के सहारे लोकसभा चुनाव लड़ना चाहती है कांग्रेस: कैलाश विजयवर्गीय
विजयवर्गीय ने कहा, ''कभी कोई कांग्रेस नेता मांग करता है कि करीना कपूर को भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़वाया जाए, तो कभी इंदौर से चुनावी उम्मीदवारी को लेकर सलमान खान के नाम पर चर्चा की जाती है. इसी तरह, प्रियंका को कांग्रेस की सक्रिय राजनीति में ले आया जाता है.''

पूर्वी उत्तरप्रदेश की प्रभारी कांग्रेस महासचिव के रूप में राजनीतिक मुख्यधारा में प्रियंका के प्रवेश को लेकर विजयवर्गीय ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाए. बीजेपी महासचिव ने कहा, 'अगर कांग्रेस में राहुल के नेतृत्व के प्रति आत्मविश्वास होता, तो प्रियंका को सक्रिय राजनीति में नहीं लाया जाता.'