नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन और अवैध कब्जों की सुनवाई 100 रुपये में, किसानों को सबसे ज्यादा फायदा

राजस्व न्यायालयों की संख्या 500 के लगभग है. जहां सीमांकन से जुड़े विवाद व बंटवारे के मामलों में आवेदन की फीस अलग-अलग होती थी. प्रकरणों के निपटारे में पांच साल तक का समय लग जाता था.

नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन और अवैध कब्जों की सुनवाई 100 रुपये में, किसानों को सबसे ज्यादा फायदा
पहले अलग-अलग मामलों की सुनवाई में लगती थी अलग फीस

हरीश दिवेकर/भोपाल: प्रदेश के किसानों को शिवराज सरकार ने बड़ी राहत दी है. कलेक्टर कार्यालय में सुनवाई के लिए मात्र 100 रुपए फीस देनी होगी. इसके अलावा किसी तरह की कोई फीस नहीं देनी होगी. इसके साथ ही आम नागरिकों को भी इतनी ही फीस जन सुनवाई के लिए खर्च करनी होगी. पहले प्रदेश के राजस्व न्यायालयों में अलग-अलग मुद्दों की सुनवाई के लिए 500 से लेकर 5 हजार तक फीस लगती थी. प्रदेश के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में 5 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं.  इनमें कमी लाने के लिए राजस्व विभाग ने यह कदम उठाया है.

पहले लगते थे 5000 रुपये तक
सरकार की इस पहल से किसानों समेत आम नागरिकों को राहत मिलेगी. पहले हर केस में अलग-अलग फीस देनी पड़ती थी. यह फीस राजस्व न्यायालयों कमिश्नर, कलेक्टर, अपर कलेक्टर, एसडीएम व तहसीलदार के यहां डायवर्सन, नामांतरण, बंटवारे, सीमांकन और अवैध कब्जों के मामलों की सुनवाई (प्रत्येक प्रकरण) के लिए मान्य होगी. अब तक 500 से लेकर 5000 रुपए तक अलग-अलग केस के हिसाब फीस लगती थी. 

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कुर्की की कार्यवाही में ही सिर्फ 100 रुपये
प्रदेश में राजस्व न्यायालयों की संख्या 500 के लगभग है. जहां सीमांकन से जुड़े विवाद व बंटवारे के मामलों में आवेदन की फीस अलग-अलग होती थी. प्रकरणों के निपटारे में पांच साल तक का समय लग जाता था. यह फीस बैंकों द्वारा कुर्क की जाने वाली संपत्ति में भी लागू होगी. 

आसान होगी प्रक्रिया-राजस्व विभाग
राजस्व विभाग के अपर सचिव श्रीकांत पांडे ने कहा कि जमीनों के विवादों से संबंधित मामलों में एक बार ही फीस जमा करना होगी. ऐसा करने से पक्षकारों को परेशान नहीं होना पड़ेगा. लोगों को सीमांकन और बंटवारे संबंधी प्रकरणों में भी इससे काफी आसानी होगी.

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जमीन संबंधी विवादों में एक बार जमा करने होंगे 100 रुपये
नई व्यवस्था के अनुसार जमीन से संबंधित विवादों के मामले में आवेदक को एक बार निर्धारित फीस जमा करनो होगी. इसके बाद किसी स्तर पर भी फीस जमा नहीं करना होगी. प्रदेश के विभिन्न राजस्व न्यायालयों में 5 लाख से ज्यादा मामले लंबित हैं. हर महीने इनमें बड़े जिलों में 5 हजार और छोटे जिलों में 1000 प्रकरणों तक की वृद्धि हो जाती है. इनमें कमी लाने के लिए प्रक्रिया को सरल किया गया है. अभी तक मामले की सुनवाई में हर स्तर पर अलग से फीस जमा करनी पड़ती थी और मामलों में सुनवाई की तारीख लंबी मिलती थी जिससे लोगों के जमीन से संबंधित विवादों के निपटारे में लंबा समय लग जाता था.

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