घटिया चावल मामला: जांच टीम को अंदेशा, मिलर्स और लोकल अधिकारी बांट रहे यूपी-बिहार का घटिया चावल

बालाघाट, मंडला, जबलपुर के वेयर हाउस से सैंपल लिए गए थे. जिसमें टीम ने पाया कि यह चावल यूपी या बिहार हो सकता है. यह घटिया क्वॉलिटी का है. टीम को धान की जो किस्में मिली हैं वह मध्य प्रदेश में नहीं उगाई जाती है. 

घटिया चावल मामला: जांच टीम को अंदेशा, मिलर्स और लोकल अधिकारी बांट रहे यूपी-बिहार का घटिया चावल

भोपाल: चावल घोटाले की जांच कर रही टीम ने बड़ा खुलासा किया है. टीम ने पाया कि गोदामों में रखा चावल एमपी की धान का नहीं है. यह चावल घटिया किस्म का है जो बिहार या उत्तर प्रदेश का हो सकता है. एफसीआई और नागरिक आपूर्ति निगम की टीम यह जांच कर रही है. 52 जिलों में चावल की गुणवत्ता की जांच की जा रही है. टीम ने अंदेशा जताया है कि चावल की घपलेबाजी में मिलर्स और जमीनी सरकारी अमले की मिलीभगत हो सकती है. वहीं सतना में भी टीम को 29 हजार टन घटिया चावल मिला है.

बालाघाट में होता है बढ़िया क्वॉलिटी का चावल
प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त टीम ने बालाघाट, मंडला, जबलपुर के वेयर हाउस से सैंपल लिए गए थे. जिसमें टीम ने पाया कि यह चावल यूपी या बिहार हो सकता है. यह घटिया क्वॉलिटी का है. टीम को धान की जो किस्में मिली हैं वह मध्य प्रदेश में नहीं उगाई जाती है. बालाघाट में पारस सोना, 1010 और महामाया जैसी उच्च क्वॉलिटी का धान उगाई जाती है.

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30 से ज्यादा लोगों के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
बालाघाट और मंडला में चावल घोटाले की जांच कर रही है ईओडब्ल्यू की टीम 22 राइस मिलर्स और 9 अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज कर चुकी है. कई टीमें 52 जिलों के वेयर हाउस और निजी गोदामों की जांच में जुटी हैं.  ईओडब्ल्यू की टीम ने बालाघाट में 18, मंडला में 4 मिलर्स और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के 9 अफसरों पर एफआईआर कर चुकी है. बालाघाट और मंडला के वेयर हाउस में रखा 30 करोड़ कीमत का 10 हजार 700 टन खराब चावल सील किया है. 

कैसे हुआ मामले का खुलासा
दरअसल, केंद्र सरकार ने कोरोना काल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत सभी राज्यों में पीडीएस के जरिए गरीबों को मुफ्त वितरण करने के लिए राशन मुहैया कराया है. इस योजना के तहत मध्य प्रदेश के भी सभी जिलों में मुफ्त राशन वितरण किया जा रहा है. मंडला और बालाघाट में राशन पाने वाले हितग्राहियों ने चावल की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की थी. भारत सरकार के फूड एवं सिविल सप्लाई मिनिस्ट्री की टीम ने इन दोनों जिलों में गरीबों को वितरित किए गए चावल की गुणवत्ता की जांच की तो यह पोल्ट्री क्वॉलिटी (मुर्गे-मुर्गियों को चारे के रूप में दिए जाने योग्य) का निकला. चावल की गुणवत्ता परखने के लिए अभी तक 1021 सेम्पल लिए गए थे जिसमें 57 सैंपल अमानक पाए गए थे.

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PMO ने मांगी थी रिपोर्ट
मामला सुर्खियों में आने के बाद केंद्र सरकार ने भी शिवराज सरकार से जवाब तलब कर पूरे मामले की जानकारी मांगी थी. जिसके बाद शिवराज सरकार ने EOW को जांच सौंप दी थी.साथ ही गुरुवार को सीएम कार्यालय की तरफ से PMO को रिपोर्ट भेज दी गई थी.

सरकार ने भेजी थी ऐसी रिपोर्ट
पीएमओ को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया कि सैंपलिंग लेने की कार्रवाई अब भी जारी है. अब तक कुल 5 संयुक्त दल गठित कर भंडारित चावल के एक हजार से अधिक सैंपल लिए जा चुके हैं. इनमें 284 सैंपल की जांच की जा चुकी है. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के स्थानीय कार्यलयों के मुताबिक चावल के 72 सैंपल वितरण के लायक हैं, जबकि 57 सैंपल सैंपल मानकों के अनुरूप नहीं हैं. राज्य के सभी जिलों में सैंपलिंग का कार्य इस सप्ताह तक पूरा कर लिया जाएगा. इसके बाद दोषी गुणवत्ता नियंत्रकों की सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी. 

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सतना में मिला 29000 क्विंटल बीआरएल कैटिगरी का चावल
टीम को सतना के गोदामों में भी अमानक चावल मिला है. जिले के गोदामों में रखा हुआ 29530 क्विंटल चावल अमानक स्तर का है जो निगम के गुणवत्ता नियंत्रक की जांच में सामने आया है. इस अमानक स्तर के चावल की कीमत करीब पौने 9 करोड़ बताई जा रही है. इस चावल को अस्वीकृति सीमा के नीचे (बीआरएल) कैटेगरी में डाला गया है. 

शिवराज के मंत्री ने लगाया कमलनाथ सरकार पर आरोप
प्रदेश में चावल घोटाले की आंच कमलनाथ तक पहुंच गई. दरअसल,  भाजपा सरकार में मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने पूर्व सीएम कमल नाथ पर आरोप लगाया कि उन्हें कमलनाथ सरकार के दौरान ही चावल घोटाले की भनक लग गई थी. इसको लेकर सरकारी नोटशीट पर घोटालेबाजों की जांच के लिए भी कमलनाथ को कहा था. इसको लेकर तोमर ने पूछा कमलनाथ ही बताएं कि उन्होंने कार्रवाई क्यों नहीं की थी.