मप्रः नहीं बनी सड़क, अब मतदान का बहिष्कार करेंगे गोदी के मतदाता

आज भी गांव में न तो सड़क है और न ही बुनियादी सुविधाएं. हमने अपनी तकलीफ कई बार जनप्रतिनिधियों को सुनाई, लेकिन आज तक हमारी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया.

मप्रः नहीं बनी सड़क, अब मतदान का बहिष्कार करेंगे गोदी के मतदाता
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्लीः मध्य प्रदेश के सीहोर के गोदी गांव में सड़क नहीं बनने से ग्रामीणों ने चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है. गोदी गांव के निवासियों का कहना है कि आजादी के कई साल बीत जाने के बाद भी गांव का हाल जस का तस है. आज भी गांव में न तो सड़क है और न ही बुनियादी सुविधाएं. हमने अपनी तकलीफ कई बार जनप्रतिनिधियों को सुनाई, लेकिन आज तक हमारी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. अपनी शिकायत लेकर हम कई बार अधिकारियों के पास भी जा चुके हैं, लेकिन वहां से भी खाली हांथ लौटना पड़ा. चुनाव नजदीक आने पर हर जनप्रतिनिधि बड़े-बड़े वादे करता है, लेकिन सत्ता हांथ लगने के बाद अपने वादे भूल जाते हैं. 

सांसद ने कहा था- चुनाव जीतूंगा तो सबसे पहले गोदी में सड़क निर्माण करवाऊंगा
वर्तमान सांसद मनोहर जटवाल ने चुनावों के समय गांव की जनता से अच्छी सड़क और शिक्षा व्यवस्था का आश्वसन दिया था, लेकिन उनके सभी वादे खोखले साबित हुए. चुनाव प्रचार के दौरान गांव आए सांसद ने कहा था कि यदि मैं चुनाव जीतूंगा तो सबसे पहले गोदी गांव में सड़क निर्माण करवाऊंगा, लेकिन आज तक गांव में सड़क निर्माण की नींव नहीं रखी गई. गांव के कई बच्चे मैना पढ़ाई के लिए जाते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण उन्हें मैना तक पैदल ही जाना पड़ता है. 

कलेक्टर से लेकर मुख्यमंत्री तक को लिख चुके हैं आवेदन
हमने अपनी समस्याओं के चलते कलेक्टर, विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक को आवेदन भेजा, लेकिन समस्याओं का कोई समाधान नहीं हुआ. इसलिए हमने फैसला लिया है कि अगर चुनावों से पहले गांव में सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया जाएगा तो हम मतदान नहीं डालेंगे. वहीं गांव के सरपंच मुन्नालाल गोयल ने बताया कि पिछले साल सड़क निर्माण के नाम पर सड़कों में 4 लाख की लागत से मुरम डलवाई थी, लेकिन बारिश के चलते वह भी पानी के साथ बह गई.

स्कूली बच्चे पैदल जाते हैं स्कूल
गांव में सड़क न होने से ग्रामीणों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. बरसात के मौसम में गांव में सड़क न होने के कारण गांव अन्य इलाकों से कट जाता है. जिससे कई बार बुनियादी जरूरतों के लिए भी गांव वालों को काफी परेशान होना पड़ता है. स्कूली छात्रों को साइकिल मिलने के बाद भी पैदल ही स्कूल जाना पड़ता है क्योंकि गांव में सड़क नहीं है. ऐसे में कई बार स्कूल से आते वक्त बच्चों को काफी देर भी हो जाती है.