बघेलखंड: 'दहाला' की धरती पर BSP-GGP के हाथों में जीत की चाबी

बघेलखंड इलाके में कुल 27 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. बीते मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2013 में इन 27 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी ने 14, कांग्रेस ने 11 और बीएसपी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी.

बघेलखंड: 'दहाला' की धरती पर BSP-GGP के हाथों में जीत की चाबी
बांधवगढ़ का किला और टाइगर रिजर्व बघेलखंड के प्रमुख पर्यटक स्‍थलों में शामिल है. (फाइल फोटो)

नई दिल्‍ली: मध्‍य प्रदेश विधान चुनाव 2018 में जीत का सेहरा किस पार्टी के सिर बंधेगा, इस फैसले में बघेलखंड की भूमिका बेहद अहम होगी. दरअसल, बघेलखंड में बीएसपी की लगातार बढ़ती ताकत न केवल बीजेपी, बल्कि कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं. बीते विधानसभा चुनाव 2013 की बात करें तो बघेलखंड क्षेत्र में आने वाली 27सीटों में बीएसपी ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया था. इस चुनाव में कई विधानसभा क्षेत्र ऐसे भी थे, जहां कांग्रेस और बीजेपी को पछाड़ने में बीएसपी कामयाब रही थी. 

2 सीटों पर बीएसपी ने दर्ज थी जीत, 4 सीटों पर रही दूसरे पायदान पर 
बघेलखंड इलाके में कुल 27 विधानसभा क्षेत्र आते हैं. बीते मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2013 में इन 27 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी ने 14, कांग्रेस ने 11 और बीएसपी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी. बीएसपी ने जिन दो विधानसभाओं में जीत दर्ज की थी, उनमें सतना जिले में आने वाली रैगांव और रीवा जिले में आने वाली मनगवां सीटें शामिल हैं. इसके अलावा, 4 सीटें ऐसी भी थीं, जहां पर बीएसपी दूसरे पायदान तक पहुंचने में कामयाब रही थी. इन विधानसभा क्षेत्रों में रामपुर (सतना), सेमरिया (रीवा), देवतालाब (रीवा) और रीवा विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. 

इन 17 विधानसभा क्षेत्रों में दिखी बीएसपी की मजबूत स्थिति
मध्‍य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2013 में बघेलखंड की 27 सीटों में बीएसपी ने 2 सीटों पर जीत दर्ज की, 4 पर दूसरे पायदान पर रही, जबकि 11 सीटों पर वह मजबूती के साथ तीसरे पायदान पर बनी रही. इस चुनाव में रैगांव ऐसी विधानसभा सीट थी, जहां पर बीएसपी और बीजेपी के बीच जीत का अंतर महज 3 फीसदी था. इसके अलावा, सतना जिले की मैहर सीट ऐसी थी, जहां पर बीजेपी को 26.84 फीसदी वोट मिले, जबकि बीएसपी का उम्‍मीदवार 26.34 फीसदी वोट पाने में सफल रहा. इसी तरह, अमरपाटन सीट पर बीजेपी के पास 24.63 फीसदी वोट थे, जबकि बीएसपी के पास 23.57 फीसदी वोट थे. 

बघेलखंड की इन सीटों पर है गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का मजबूत असर
बघेलखंड में बीजेपी और कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाने के लिए बीएसपी के साथ गोंडवाना गणतंत्र पार्टी भी मौजूद है. गोंडवाना गणतंत्र पार्टी  (जीजीपी) का बघेलखंड के अंतर्गत आने वाली 8 विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत आधार है. बीते विधानसभा चुनाव 2013 में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी यानी जीजीपी ने किसी सीट पर जीत तो हासिल नहीं की, लेकिन वह करीब सात सीटों पर मजबूती के साथ तीसरी पायदान पर बनी रही. जीजीपी का जिन विधानसभा क्षेत्रों में असर हैं, उसमें शहडोल जिले में आने वाली ब्‍यौहारी, जयसिंह नगर, जैतपुर, अनूपपुर जिले में आने वाली कोतमा, अनूपपुर और पुष्‍पराजगढ़ सीट शामिल है. इनके अलावा, जीजीपी का उमरिया जिले की बांधवगढ़ और मानपुर सीट पर भी अच्‍छा प्रभाव है.  

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बघेलखंड का भौगोलिक परिदृश्‍य
बघेलखंड का क्षेत्र उत्‍तर प्रदेश-मध्‍य प्रदेश की सीमा पर स्थिति चित्रकूट विधानसभा से लेकर मध्‍य प्रदेश-छत्‍तीसगढ़ की सीमा तक फैला हुआ है. बघेलखंड की सीमा के आने वाले जिलों में सतना, रीवा, सीधी, शहडोल, अनूपपुर और उमरिया जिले शामिल हैं. बघेलखंड के पूर्व में बलुआ पत्थर के पठार हैं, वहीं कैमूर शृंखला इस क्षेत्र को दो प्राकृतिक प्रदेशों में बांटती है. इस क्षेत्र की प्रमुख नदियों में टोंक, सोन और उनकी सहायक नदियां शामिल हैं.  इसके अलावा, विंध्य पर्वत की वनयुक्त शृंखला इस क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाती हैं. इतना ही नहीं, बघेलखंड का दक्षिण और पूर्वी हिस्‍सा ग्रेनाइट पत्‍थरों से भरा हुआ है. 

दहाला के नाम से जाना जाता था बघेलखंड 
इतिहास के पन्‍नों में बघेलखंड का नाम 'दहाला' नाम दर्ज है. यहां पर छठी से 12वीं शताब्‍दी तक कलचुरी वंश का सामन था. 14वीं शताब्‍दी में यहां पर बघेल राजपूतों का शासन आया. जिनके नाम पर इस क्षेत्र को बघेलखंड के नाम से पहचाना गया. 

खनिज संपदा का धनी है बघेलखंड इलाका
बघेलखंड में मुख्‍य रूप से धान, गेहूं, मक्‍का ओर चना की खेती होती है. यह क्षेत्र प्राकृतिक खनिज संपदा का धनी है. यहां पर कोयला, एल्युमिनियम वाली मिट्टी बॉक्साइट, चिकनी मिट्टी और क्वार्ट्ज़ की विपुल खनिज संपदा मौजूद है.