Garlic Farming: लहसुन की खेती का ये तरीका जान लें किसान, दोगुनी होगी फसल
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Garlic Farming: लहसुन की खेती का ये तरीका जान लें किसान, दोगुनी होगी फसल

लहसुन की खेती फायदा का सौदा हो सकता है. इसकी खेती के लिए नवंबर महीने तक की जा सकती है. अगर इस सीजन तक किसान लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो उन्हें खास तरह की उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करना चाहिए.

Garlic Farming: लहसुन की खेती का ये तरीका जान लें किसान, दोगुनी होगी फसल

ई दिल्ली: लहसुन की खेती फायदा का सौदा हो सकता है. इसकी खेती के लिए नवंबर महीने तक की जा सकती है. अगर इस सीजन तक किसान लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो उन्हें खास तरह की उन्नत किस्मों का इस्तेमाल करना चाहिए. लहसुन की गोदावरी, श्वेता और भीमा ओमेरी जैसी किस्मों ज्यादा फायदा पहुंचा सकती हैं. 

इतना ही नहीं लहसुन की राजली गादी जी-451, फवरी, सलेक्षन-2 और सलेक्षन-10 किस्में अच्छा रिटर्न दे सकती हैं. इन बीजों को क्षेत्र के वातावरण और मिट्टी के हिसाब से विकसित किया गया है. 

अगर किसान लहसुन की खेती करना चाहते हैं तो कुछ बातें ध्यान रखनी चाहिए. इससे उनकी फसल अच्छी होगी. इसमें सबसे पहले खेत की कम से कम तीन बार जोताई करानी चाहिए. भरपूर मात्रा में खाद का डालें. एक हेक्टेयर खेत में 100 किलो ग्राम नाइट्रोजन, 50 किलो फास्फोरस, पोटाश और सल्फर का प्रयोग करें. लेकिन यह ध्यान रखें कि 100 किलो नाइट्रोजन खेत में एक ही बार में नहीं डालना है, अगर ऐसा किया तो फसल बर्बाद हो जाएगी. फसल लगाते समय 35 किलो, लगाने के 30 दिन बाद 35 किलो और 45 दिन बाद 30 किलो प्रति हेक्टेयर के हिसाब से खाद डालें.

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जुताई के बाद बारी आती है फसल रोपने की बारी
खेत की जुताई और खाद डालने के बाद बारी आती है कतार बनाने की. इसके लिए इस बात का ध्यान रखना है कि कतार की दूरी 15 सेंटी मीटर हो. वहीं पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटी मीटर होने चाहिए. इन बातों का ध्यान रखकर फसल रोपेंगे तो अच्छा रिटर्न मिल सकता है. फसल रोपने के बाद खरपतवार हटाना बिलकुल भी नहीं भूलना चाहिए. इसके लिए उन्हें खेत में पेंडामेथलिन की 3.5 से 4 मिली दावा की मात्रा को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़क दें.

बुआई के तत्काल बाद हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए. शेष समय में वानस्पतिक वृद्धि के समय 7-8 दिन के अंतराल पर तथा फसल परिपक्वता के समय 10-15 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहना चाहिए. सिंचाई हमेशा हल्की एवं खेत में पानी भरने नही देना चाहिए. अधिक अंतराल पर सिंचाई करने से कलियां बिखर जाती हैं.

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