कवर्धा में कर्फ्यू के बीच किया गया रावण का दहन, नहीं निकाली गई परंपरागत शाही सवारी
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कवर्धा में कर्फ्यू के बीच किया गया रावण का दहन, नहीं निकाली गई परंपरागत शाही सवारी

कर्फ्यू के बीच कवर्धा शहर में शाही दशहरा और रावण दहन का कार्यक्रम कुछ सीमाओं के तहत संपन्न हुआ.

कवर्धा में कर्फ्यू के बीच किया गया रावण का दहन, नहीं निकाली गई परंपरागत शाही सवारी

कवर्धाः छत्तीसगढ़ के कवर्धा में कर्फ्यू के बीच दशहरा पर रावण के पुतले का दहन किया गया. हालांकि इस दौरान पुलिस की सख्ती नजर आई. क्योंकि 3 अक्टूबर को झंडा लगाने के नाम पर दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था. विवाद इतना गहराया के बाद में इस घटना ने हिंसात्मक रूप ले लिया प्रशासन को शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए कर्फ्यू लगाना पड़ा. हालांकि कवर्धा की स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. लेकिन दशहरे के मौके पर यहां पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था थी. 

सीमित लोगों को मिली एंट्री 
कर्फ्यू के बीच कवर्धा शहर में शाही दशहरा और रावण दहन का कार्यक्रम कुछ सीमाओं के तहत संपन्न हुआ. बता दें कि कवर्धा में परंपरागत रूप से शाही दशहरा मनाने की परंपरा है, जहां राज परिवार की उपस्थिति में सरदार पटेल मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न होता है. फिर पूरे शहर में राजा की सवारी भ्रमण करती है और लोगों से मुलाकात और दशहरा की बधाई देने का सिलसिला चलता है. पूरे शहर में रात भर बाजारों में रौनक हुआ करती थी. लेकिन इस बार दशहरा पर हालात अच्छे नहीं होने के कारण प्रशासन ने दशहरा महोत्सव की टीम को सीमित सदस्य संख्या के बीच रावण दहन के कार्यक्रम की अनुमति दी थी. 

नहीं निकाली गई शाही सवारी 
जिसके बाद कुछ लोगों की उपस्थिति में ही  सरदार पटेल मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न किया गया. वहीं इस बार राजा के नगर भ्रमण कार्यक्रम की अनुमति भी नहीं दी गई. बाजार भी शांत था बाजार में कोई रौनक नहीं थी. कर्फ्यू के चलते शाम 5 बजे के बाद से व्यापार-व्यवसाय बंद थे जिसके चलते बहुत ही शांत माहौल में सादगी पूर्ण रावण दहन का कार्यक्रम संपन्न हुआ. इस बीच पुलिस जवानों की तैनाती रही ताकि किसी भी घटना को तत्कालिक तौर पर रोका जा सके. 

हालांकि कवर्धा के लोगों का कहना है कि उनका शहर आम तौर पर शांत रहने वाला शहर है. इसलिए जल्द ही शहर की स्थित्तियां सामान्य हो जाएगी. लोगों ने कहा कि दशहरे पर रावण के सभी बुराई जलकर खाक हो जाएगी. 

क्या कवर्धा विवाद 
दरअसल, कवर्धा में 3 अक्टूबर को देवारपारा में त्योहार से पहले लोग शहर में अपने धार्मिक चिन्हों के प्रतीक के साथ चौक-चौराहों पर तैयारी कर रहे हैं. इसी कड़ी में लोहारा नाका चौक पर बने डिवाइडर पर लगे डंडे पर झंड़ा लगाने की हक की लड़ाई शुरू हो गई. झंडे पर हमारा हक है कहते हुए दो समुदाय के सैकड़ों लोग आपस में भीड़ गए. स्थिति इतनी भयंकर थी कि मारपीट तक शुरू हो गई. इसके बाद मामले हिंसक रुप ले लिया. जिसके बाद पूरे शहर का माहौल गड़बड़ हो गया. इस दौरान शहर में जमकर हिंसा हुई. बाद में कई लोगों पर एफआईआर भी दर्ज की गई थी. फिलहाल इस मामले में 70 लोग जेल में भी बंद है. 

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