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Zee Madhya Pradesh ChhattisgarhPhotosमोहन सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, सोयाबीन पर होगा बंपर फायदा; एक बार फिर बढ़ गई भावांतर योजना की राशि
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मोहन सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा, सोयाबीन पर होगा बंपर फायदा; एक बार फिर बढ़ गई भावांतर योजना की राशि

Bhavantar Yojana: मध्य प्रदेश सरकार ने किसानों को एक बड़ी सौगात देते हुए भावांतर योजना की राशि में बढ़ोतरी की है. सरकार ने सोयाबीन का मॉडल रेट बढ़ाकर ₹4225 प्रति क्विंटल कर दिया है. भावांतर योजना के तहत किसानों को मिलने वाली राशि की गणना अब इसी नए मॉडल रेट के आधार पर की जाएगी, जिससे उन्हें काफी फायदा होगा.

 

मोहन सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा

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मोहन सरकार का किसानों को बड़ा तोहफा

मध्य प्रदेश सरकार ने भावांतर योजना के तहत सोयाबीन के मॉडल रेट में बढ़ोतरी का अहम फैसला लिया है, जिससे राज्य के लाखों सोयाबीन किसानों को राहत मिलेगी. इससे किसानों को काफी फायदा होगा.

 

4225 रूपये प्रति क्विंटल

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4225 रूपये प्रति क्विंटल

सरकार ने सोयाबीन का मॉडल रेट भावांतर राशि के लिए 4225 रूपये प्रति क्विंटल किया है, जो किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस मॉडल रेट के आधार पर ही किसानों को भावांतर राशि का भुगतान किया जाएगा, यानी जितना मॉडल रेट बढ़ेगा किसानों को मिलने वाला अंतर भी उतना ही बढ़ेगा.

 

लगातार बढ़ोतरी जारी

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लगातार बढ़ोतरी जारी

बता दें कि सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को ₹4,020 प्रति क्विंटल जारी किया गया था. सोयाबीन के मूल्य अंतर की गणना नए मॉडल रेट के आधार पर की जाएगी.

 

7 नवंबर को पहला मॉडल रेट

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 7 नवंबर को पहला मॉडल रेट

पिछले कुछ दिनों में सोयाबीन मॉडल रेट में लगातार बढ़ोतरी की गई है. 7 नवंबर को पहला मॉडल रेट 4020 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया गया था. इसके बाद 11 नवंबर को इसे बढ़ाकर 4056 रुपये किया गया. अब 15 नवंबर को सरकार ने इसे एक बार फिर संशोधित करते हुए 4225 रुपये पर पहुंचा दिया. 

 

मॉडल रेट का फायदा

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मॉडल रेट का फायदा

मॉडल रेट में वृद्धि होने से यदि किसानों को बाजार में कम दाम भी मिलेंगे तो सरकार उस अंतर की भरपाई करेगी, जिससे उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा.

 

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यह कदम एक बड़ी राहत है. खासकर उन किसानों के लिए जो इस बार उत्पादन लागत को लेकर परेशान थे. सरकार के इस फैसले को रबी सीजन से पहले किसानों का आत्मविश्वास बढ़ाने और कृषि आय को स्थिर करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.