mp ranks three in the production of coarse grains: मध्य प्रदेश को कृषी प्रधान राज्य कहा जाता है जहां खेती किसानी मुख्य तौर लोगों की मुख्य जीवनी है. मध्य प्रदेश, सोयाबीन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान हासिल किए हुए है. हालांकि एक और श्रेणी है जहां एमपी देश में तीसरा स्थान हासिल किया है और वो है देश में मोटे अनाज का उत्पादन. एमपी धीरे-धीरे मोटे अनाज के उत्पादन की ओर आगे बढ़ रहा है.
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भारत का दिल कहे जाना वाला मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है. यहां के लोग अमूमनतौर पर खेती किसानी से जुड़े हुए हैं. एमपी में सोयाबीन, गेहूं, दलहन, तीलहन और चने का उत्पाद भारी मात्रा में किया जाता है जो बाद में देश के अलग-अलग कोनों में बिक्री के लिए भेजा जाता है.
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2024–25 के आंकडों के हिसाब से मध्य प्रदेश धीरे-धीरे अब मोटे अनाज की खेती की तरफ भी आगे बढ़ रहा है, जिस वजह से देश में मोटे अनाज की खेती करने की श्रेणी में मध्य प्रदेश तीसरे स्थान पर शामिल है.
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2024–25 में एमपी ने 77.75 लाख टन मोटे अनाज का उत्पादन किया था वहीं 2022–23 में 59.13 लाख टन और 2023–24 में 56.74 लाख टन का उत्पादन हुआ था. इस श्रेणी में कर्नाटक पहला स्थान हासिल किए हुए है वहीं राजस्थान दूसरे स्थान पर आता है.
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मोटे अनाज की खेती में देश में मध्य प्रदेश की कुल हिस्सेदारी 12.17 प्रतिशत है, जहां ज्वार, मक्का और बाजरे की खेती की जा रही है.
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अब आखिर ऐसा क्या हुआ कि किसानों ने मोटे अनाज की खेती की तरफ रूख किया. दरअसल मोटे अनाज की खेती कम लागत वाली होती हैं और पानी पर भी ज्यादा निर्भर नहीं होना पड़ता है जिस वजह से किसानों को ये खेती ज्यादा सुरक्षित साबित हो रही और अन्नदाता गेहूं-धान की जगह बाजरा-ज्वार की तरफ आगे बढ़ रहे हैं.
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समर्थन मूल्य, बोनस और बीज सहायता जैसी योजनाओं की वजह से किसानों को इनकी खेती पर भरोसा हुआ है. शहरी इलाकों में हेल्दी के नाम पर मोटे अनाज मार्केट बनाते दिखाई दे रहे हैं जहां बाजारों में भी इनकी मांग बढ़ती जा रही है.
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मध्य प्रदेश के भिंड, बुरहानपुर, छतरपुर, बैतूल, दतिया, विदिशा, खरगोन, सागर में मोटे अनाज की खेती भारी मात्रा में की जा रही है जो अब धीरे-धीरे मध्य प्रदेश की पहचान बनते जा रहा है. मोटे अनाज की खेती में देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य बना MP, जानिए क्यों ज्वार-बाजरा की खेती की तरफ रूख कर रहे मध्य प्रदेश के किसान
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