MP Unique Tradition of Marriage-देश के दिल यानी मध्यप्रदेश को अजब-गजब भी कहा जाता है. यह प्रदेश अपनी अनोखी संस्कृति और विविधताओं के लिए प्रसिद्ध है. मध्यप्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता, प्राचीन इतिहास और अनोखी परंपराओं के लिए जाना जाता है. यहां की ऐतिहासिक विरासतें और प्रकृति के करीब रहने वाली जनजातियां इस प्रदेश को सबसे अलग बनाता हैं. विशेष रूप से यहां का आदिवासी समाज आज भी अपनी सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं को संजोए हुए है. आदिवासियों में कई तरह की मान्यताएं और परंपराएं आज भी कायम हैं.
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मध्यप्रदेश का आदिवासी हृदय भी कहा जाता है, क्योंकि यहां देश की सबसे बड़ी जनजातीय आबादी निवास करती है. यह राज्य न केवल अपनी भौगोलिक सीमाओं के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां की जनजातीय संस्कृतियों की विविधता इसे वैश्विक स्तर पर खास बनाती है. यहां आज भी खास परंपराएं जारी हैं, जो आधुनिक दुनिया के लिए किसी अचरज से कम नहीं है.
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मध्यप्रदेश में देश की सबसे ज्यादा आदिवासी आबादी निवास करती है. यहां कई जनजातियां निवास करती हैं, जिनकी अपनी एक विशिष्ट जीवनशैली और संस्कार हैं. इन समुदायों की रस्मों-रिवाजों में ऐसी गहराई और विविधता देखने को मिलती है.
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आदिवासियों की गोंड जनजाति में विवाह की एक बहुत ही खास और प्रचलित परंपरा है, जिसे दूध लौटावा कहा जाता है. इस प्रथा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें परिवार के भीतर ही शादी की जाती है. जिस तरह मुस्लिमों में कजिन मैरिज होती है, वैसे ही इस परंपरा के तहत यहां भी मामा-बुआ की लड़की से शादी होती है.
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गोंड समाज में भाई का लड़का और बहन की लड़की, या फिर भाई की लड़की और बहन का लड़का आपस में शादी कर सकते हैं. सरल शब्दों में कहे तो ममेरे और फुफेरे भाई-बहनों के बीच शादी का यह संस्कार प्रचलित है. यह परंपरा मुख्य रूप से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में निभाई जाती है.
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दूध लौटावा विवाह संस्कार की एक खूबसूरती यह भी है कि इसमें व्यक्ति को अपने जीवनसाथी को चुनने में भावनाओं और स्नेह को प्राथमिकता देने का अवसर मिलता है. समाज इसे पवित्र बंधन मानता है. इस परंपरा के अलावा गोंड जनजाति में विधवा विवाह और बहु-विवाह जैसी प्रथाएं भी काफी प्रचलित हैं. यह परंपराएं समाज की व्यवस्था भी दर्शाती हैं.
DISCLAIMER-यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है, ZEE MPCG इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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दूध लौटावा विवाह के अलावा भी मध्यप्रदेश की अलग-अलग जनजातियों में कई तरह की अनूठी परंपराएं मौजूद हैं. आदिवासी समाज के लोग इन संस्कारों को अपनी जड़ों से जोड़कर देखते हैं. इन परंपराओं को समाज के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी आगे भी बढ़ा रहे हैं.
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