Modified UDAN Scheme-मध्यप्रदेश के लिए केंद्र सरकार की मॉडिफाइड उड़ान योजना बड़ी गेमचेंजर साबित होने वाली है, जिससे रीवा, सतना और जबलपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में हवाई कनेक्टिविटी का विस्तार होगा. इस योजना के तहत केवल हवाई यात्रा सुलभ और सस्ती होगी, बल्कि विजीबिलटी गैप फंडिंग की समय सीमा को बढ़ाकर 5 साल करने से एयलाइंस कंपनियों को छोटे शहरों के लिए उड़ानें शुरू करने में प्रोत्साहन मिलेगा. जबलपुर जैसे केंद्रों पर एयरपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम के विकास से प्रदेश में रोजगार और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे और स्थानीय स्तर पर तैयार हुए विमानों का इस्तेमाल हवाई ढांचे और मजबूत करेगा.
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केंद्रीय कैबिनेट ने संशोधिक उड़ान योजना को मंजूरी दे दी है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा मध्यम वर्ग के लोगों को मिलेगा.सरकार का लक्ष्य है कि छोटे शहरों में रहने वाले लोग भी कम खर्च में हवाई यात्रा कर सकें. इसके लिए बड़े विमानों में ज्यादा सीटें और कम किराए का विशेष प्रावधान किया गया है.
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यह योजना नागरिक उड्डयन क्षेत्र में लंबे समय तक जारी रखने के लिए तैयार की गई है. सरकार ने इसके लिए 28,840 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया है, जिसे अगले 10 सालों के दौरान खर्च किया जाएगा. इससे हवाई संपर्क को न केवल सुलभ बल्कि लंबे समय तक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगा.
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हवाई रास्तों को आर्थिक रूप से फायदेमंद बनाने के लिए सरकार ने वायबिलिटी गैप फंडिंग की समय सीमा को 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दिया है. इसका मतलब है कि अब एयरलाइंस कंपनियों को सरकार की ओर से ज्यादा समय तक वित्तीय सहायता मिलेगा, जिससे वे छोटे शहरों के लिए आसानी से उड़ानें चला सकेंगी.
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सरकार का विजन है कि देश का कोई भी हिस्सा हवाई सेवा से अछूता न रहे. इसी कड़ी में देशभर में 100 नए हवाई अड्डों के विकास का लक्ष्य रखा गया है. साथ ही, कठिन और पहाड़ी इलाकों के लिए 200 नए हेलीपोर्ट्स बनाने भी योजना है, ताकि हवाई कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ सके.
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नए एयरपोर्ट्स और वॉटर एयरोड्रोम विकसित होने से स्थानीय स्तर पर व्यापारिक गतिविधियां तेज होने की संभावनाएं हैं. साथ ही हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने से पर्यटन को तेजी से बढ़ावा मिलेगा. व्यापारिक गतिविधियां और पर्यटन को बढ़ावा मिलने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
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यह योजना आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी पूरा करती है. इसके तहत देश में बने विमानों, जैसे HAL डोर्नियर के इस्तेमाल पर जोर दिया जाएगा. घरेलू विमान निर्माण को बढ़ावा देने से न केवल लागत कम होगी, बल्कि लोगों को कम दामों में हवाई यात्रा करने की सुविधा भी मिलेगी.
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हवाई अड्डों के विकास के लिए सरकार चैलेंज मोड अपनाएगी, जिसमें राज्य अपनी तैयार और सक्रियता के आधार पर शामिल हो सकेंगे. मध्यप्रदेश जैसे राज्यों की भागीदारी से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का ढांचा और ज्यादा मजबूत होगा.
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