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Zee Madhya Pradesh ChhattisgarhPhotosये है एमपी का सबसे अनपढ़ और गरीब जिला! आंकड़े जान रह जाएंगे हक्के-बक्के; जानिए इसका क्षेत्रफल
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ये है एमपी का सबसे अनपढ़ और गरीब जिला! आंकड़े जान रह जाएंगे हक्के-बक्के; जानिए इसका क्षेत्रफल

Most Poorest District Of MP: मध्य प्रदेश में 55 जिले हैं, जिनमें कई जिले सारक्षरता, विकास के मामले में मिसाल बन चुके हैं. कहीं तकनीकी शिक्षा का बोलबाला तो कहीं पर उद्योगों की भरमार है. वहीं मध्य प्रदेश का एक ऐसा जिला है, जहां पर आज भी लोग शिक्षा से कोसों दूर हैं, यहां पर लोग गरीबी की चपेट में अपना जीवन गुजार रहे हैं. इस जिले में न सिर्फ गरीबी है, बल्कि यहां पर साक्षरता भी न के बराबर मानी जाती है. आइए इस जिले के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं.

एमपी का सबसे अनपढ़ और गरीब जिला!

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एमपी का सबसे अनपढ़ और गरीब जिला!

देश में कभी भी सबसे कम साक्षरता वाले जिलों की बात होती है, तो लोगों को बिहार का ख्याल आने लगता है. शायद आप भी जानकर हैरान होंगे कि सबसे कम पढ़ा लिखा जिला, बिहार में नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश में स्थित है. आइए इस जिले के बारे में जानते हैं.

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दरअसल, हम मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले की बात कर रहे हैं. यह जिला आदिवासी बहुल जिला माना जाता है. यहां पर साक्षरता दर लगभग 40 फीसदी से कम मानी जाती है. इसी लिए देश में सबसे कम पढ़ लिखा जिला अलीराजपुर को माना जाता है. इसके अलावा, यह जिला गरीब भी माना जाता है.

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2011 की जनगणना के मुताबिक, अलीराजपुर जिले में साक्षरता दर महज 36.10 फीसदी है. यानि यहां पर 100 व्यक्तियों में से सिर्फ36 लोग ही पढ़े-लिखे हैं. जबकि राष्ट्रीय औसत साक्षरता दर 74 फीसदी के आसपास है. यह बढ़कर 2023-24 में 80.9% हो गई है. (यहां दिए गए आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिए गए हैं.)

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वहीं बात करें अलीराजपुर जिले की तो यहां पर पुरुषों की साक्षरता दर लगभग 51.92% है, लेकिन महिलाओं की स्थिति बेहत चिंताजनक मानी जा रही है. यानि महिलाओं की साक्षरता दर सिर्फ 20.29% है. शिक्षा की कमी के कारण यहां बच्चियों की शादी जल्दी हो जाती है और रोजगार के अवसर भी सीमित हैं.

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आपको बता दें, कि अलीराजपुर जिला आदिवासी बहुल इलाका माना जाता है. यहां पर आधुनिक जीवनशैली, शिक्षा और तकनीकी सुविधाएं, लोगों से काफी दूर हैं. यहां पर लोग अधिकतर खेती पर निर्भर रहते हैं, लेकिन कृषि भी पारंपरिक तरीकों से की जाती है. रोजगार के साधन की कमी के चलते लोग मजदूरी के लिए शहरों में जाने के लिए मजबूर हो जाते हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जिले में गरीबी की बात करें, तो 71 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे आते हैं. यहां पर सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं आज भी बेहत कमजोर हैं. यहां पर स्कूल तो हैं, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है. सरकारी योजनाएं भी पूरी तरह से जमीन तक नहीं पहुंच रही हैं.

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मिली जानकारी के मुताबिक, एमपी का अलीराजपुर जिला, पहले झाबुआ जिले में आता था. 17 मई 2008 को इसे स्वतंत्र जिला के रूप में घोषित किया गया था. यह जिला गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा से लगा हुआ है. यह मालवा क्षेत्र में बसा है, जिसकी आबादी लगभग 7.28 लाख बताई जाती है.

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आपको बता दें, कि अलीराजपुर जिले में कुल 5 तहसील, अलीराजपुर, जोबट, सोंडवा, कट्ठीवाड़ा और चंद्रशेखर आजाद नगर शामिल हैं. इसके अलावा, जिले में 288 ग्राम पंचायत और 552 गांव हैं. इस जिले का कुल क्षेत्रफल 3182 वर्ग किमी है. इस जिले में सबसे ज्यादा जंगल हैं, इसी वजह से यहां पर विकास में बाधा बन रहे हैं.