MP All River Route and List: मध्य प्रदेश को नदियों का मायका कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यहां पर कई महत्वपूर्ण नदियों का उद्गम हुआ है. यह नदियां आगे चलकर दूसरे राज्यों की जीवनरेखा भी बनती हैं. कई नदियां ऐसी हैं, जिनकी धार्मिक मान्यताएं भी हैं, जो लोगों के जीवन का हिस्सा मानी जाती हैं. क्या आप जानते हैं, किस नदी का कहां से उद्गम हुआ है. और किन-किन जिलों से होकर गुजरती है. आइए आज हम आपको विस्तार से बताते हैं.
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मध्य प्रदेश में कई नदियों का उद्गम हुआ है. कई नदियों का महत्व इतना है कि लोग इसे जीवन का हिस्सा भी मानते हैं. आइए आज हम आपको इन नदियों के उद्गम स्थान और किन किन जिलों से होकर गुजरती है. बताते हैं.
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नर्मदा नदी का उद्गम अनूपपुर जिले के अमरकंटक की सबसे मशहूर पहाड़ियों से होता है. इसी वजह इसे एमपी की संस्कृति और जीवन से जोड़ा जाता है. यह नदी शहडोल, उमरिया, डिंडौरी, मंडला, नरसिंहपुर, नर्मदापुरम, खंडवा, खरगोन, बड़वानी और जबलपुर जैसे जिलों से होकर गुजरती है. इस नदी के किनारे जो भी गांव बसे हैं, वहां के लोग उसे अपनी असली जीवनदायिनी मानते हैं.
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चंबल नदी, का उद्गम स्थान महू जिले के पास एक जानापाव पहाड़ियों से निकलती है. यह आगे चलकर इंदौर, उज्जैन संभाग के कई बड़े-बड़े इलाकों से होकर गुजरती है. इसके बाद, भिंड, मुरैना की तरफ आगे बढ़ते हुए दोनों जिलों की सीमा भी बनाती है. वहीं यूपी के इटावा के पास यमुना नदी में मिल जाती है. जहां पर पांच नदियों की धारा एक साथ गिरती है.
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बेतवा नदी भोपाल के आसपास की पहाड़ियों से निकलकर मध्य प्रदेश के दिल की धरती को छूती हुई बुंदेलखंड इलाके की तरफ बहती है. इसका बहाव ओरछा के पास से गुजरता है, जहां इसके तट पर बने ऐतिहासिक स्थल आज भी इसके महत्व की गवाही देते हैं.
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माही नदी का उद्गम धार जिले की पहाड़ियों से होता है. अपनी यात्रा में यह धार के ग्रामीण इलाकों को सींचती हुई झाबुआ और रतलाम जिलों में पहुंचती है. पश्चिमी मध्य प्रदेश के खेतों और गांवों के जीवन में माही नदी की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है.
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तवा नदी मध्यप्रदेश की छोटी लेकिन महत्वपूर्ण नदियों में गिनी जाती है. इसका उद्गम होशंगाबाद जिले के पचमढ़ी क्षेत्र की महादेव पहाड़ियों से माना जाता है. सतपुड़ा रेंज से बहती यह नदी नर्मदापुरम की जमीन को सींचते हुए तवा डैम से होकर गुजरती है और आगे चलकर नर्मदा नदी में समाहित हो जाती है.
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शिप्रा नदी उज्जैन की आस्था और पहचान से गहराई से जुड़ी मानी जाती है. इसका उद्गम धार जिले की विंध्य पर्वतमाला स्थित काकरी-टेकड़ी में माना जाता है. मालवा पठार से गुजरते हुए यह नदी उज्जैन के घाटों और मंदिरों को जीवन देती है. कुंभ मेले में करोड़ों श्रद्धालुओं की श्रद्धा का केंद्र बनने वाली शिप्रा आगे चलकर चंबल नदी में मिल जाती है.
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सोन नदी का उद्गम अमरकंटक की पवित्र भूमि से माना जाता है. यह नदी मध्य प्रदेश के पूर्वी इलाकों को छूते हुए आगे बढ़ती है और अपने साफ-सुथरे जल के लिए जानी जाती है. आदिवासी क्षेत्रों में सोन नदी को एक शांत और पावन धारा माना जाता है.
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तमसा नदी का उद्गम मैहर क्षेत्र की पहाड़ियों से माना जाता है. यह नदी सतना और आसपास के इलाकों से होकर आगे बढ़ती है. कई गांवों में तमसा को स्थानीय लोककथाओं और प्राचीन धार्मिक मान्यताओं से जोड़ा जाता है, इसलिए इसका सांस्कृतिक महत्व भी काफी गहरा है.
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