2026 Garlic Rate Madhya Pradesh-मध्यप्रदेश में आजकल गांव की चौपाल हो या शहर की मंडी, हर तरफ बस की एक बात चल रही है, लहसुन के दाम. इस साल लहसुन ने मध्यप्रदेश के किसानों की किस्मत में चार चांद लगा दिए हैं. पिछले कुछ सालों में जहां लहसुन के दामों ने किसानों के चेहरे पर मुस्कुराहट लाई थी, वहां साल 2026 में शुरुआत में सफेद सोने की चमक फिर बढ़ गई है. हर किसान के मन में बस यही सवाल है कि भाव आगे बढ़ेंग या घटेंगे, और अपनी फसल मंडी ले जाने का सही समय क्या है. चलिए जानते हैं कि इस साल कितने रह सकते हैं लहसुन के दाम...
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लहसुन की फसल उगाने वाले किसानों के लिए 2026 वरदान जैसा आया है. जनवरी और फरवरी के महीनों में लहसुव के भावों ने रफ्तार पकड़कर सबको चौंका दिया. मंडियों में भाव 12 हजार रुपए से लेकर 15 से 22 हजार प्रति क्विंटल के ऊपर तक चल रहे हैं. बाजार के जानकारों का कहना है कि इस बार मांग तेज है, ऐसे में किसानों को फसल के अच्छे दाम मिल सकते हैं. ॉ
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इस बार के बाजार में अभी तक एक चीज स्पष्ट दिख रही है कि लहसुन जितना अच्छा, भाव उतना ही तेज. अगर आपका लहसुन अच्छी चमक वाला, बड़े साइज और ठोस, तो व्यापारी उसे तुरंत खरीद रहे हैं. जहां आम लहसुन अच्छे दामों पर बिक रहा है, वहीं सुपर क्वालिटी और ऊटी लहसुन का भाव नीमच और भोपाल जैसी मंडियों में 18 हजार से 21 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच रहा है. यानी जितनी अच्छी छंटाई और उतना मुनाफा
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3 मार्च को मध्यप्रदेश की मंडियों में बड़ी हलचल देखी गई. दलोदा और नीमच जैसी मंडियों में तो बेहतरनी लहसुन 21 हजार रुपए के भी पार निकल गया है. भोपाल में अधिकतम भाव 21 रुपए, मनासा में 19, 900 रुपए और गौतमपुरा मंडी में 16, 900 रुपए प्रति क्विंटल तक देखा गया है. वहीं मंदसौर और इंदौर में औसत भाव 4 से 6 हजार रुपए के आसपास बना हुआ है, लेकिन यह भाव लो क्वालिटी लहसुन का है.
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फरवरी के आखिर में और मार्च की शुरुआत में ऊटी लहसुन भी मंडी में आने लगा है. डिजिटल प्लेटफॉर्म और खबरों की मानें तो फिलहाल बाजार मजबूत है. खरीदार अच्छी क्वालिटी का माल देखते ही ऊंचे दामों पर बोली लगा रहे हैं. पुराना फसल की कमी होने की वजह से नई फसल तेजी से अच्छे रेट पकड़ रही है, जिससे मंडियों में रौनक लौट आई है.
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जैसे-जैसे मार्च से अप्रैल की तरफ समय बढ़ेगा, मंडियों में नई लहसुव की बंपर आवक शुरू हो जाएगी. जब मंडी में माल ज्यादा आता है, भाव में गिरावट या नरमा-गर्मी देखने को मिलती है. लेकिन जानकारों का कहना है कि किसानों के लिए चिंता का विषय यह नहीं है, क्योंकि इस साल लहसुन का बेस मजबूत है जिससे भाव अच्छे मिलने के आसार हैं.
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अच्छे भाव के चक्कर में किसान आमतौर पर एक बड़ी गलती कर देते हैं, वे गीला या कच्चा लहसुन मंडी ले आते हैं. याद रहे, गीले लहसुन का वजन भी घटता है और व्यापारी उसके दाम भी बहुत कम लगाते हैं. अगर आपको 15 रुपए से ऊपर का भाव चाहिए, तो लहसुन को अच्छी तरह सुखाकर और साफ-सफाई के बाद ही मंडी लाएं. पक्का और सूखा माल ही आपको मालामाल बनाएगा.
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बता दें कि लहसुन का बाजार हर दिन ऊपर-नीचे होता रहता है. विदेशी मांग और मौसम का भी इस पर असर पड़ता है. इसलिए किसानों को सलाह है कि किसी की बातों में आकर या अफवाहों में लाकर फसल न निकालें. फसल बेचने से पहले मंडी जाकर खुद भाव पता करें और फिर फसल बेचने का फैसला लें.
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