gujari mahal in Gwalior: एक महिला जिसने अपनी खूबसूरती, बुद्धिमत्ता और कौशल से शादीशुदा राजा को भी अपना दीवाना बना दिया था, वो कोई और नहीं बल्कि स्वयं मृगनयनी थीं. मृगनयनी इतनी सुंदर और निपुण थीं कि पहले से ही विवाहित राजा मानसिंह तोमर अपना दिल मृगनयनी पर हार बैठे. दोनों ने शादी करने का फैसला लिया, लेकिन शादी से पहले मृगनयनी ने एक ऐसी शर्त रखी जिसकी छटा आज भी ग्वालियर में दिख जाती है.
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यह तकरीबन 15वीं शताब्दी की बात है, जब मृगनयनी के प्यार में दीवाने हुए राजा मानसिंह तोमर ने मृगनयनी द्वारा रखी शादी की शर्तों को पूरा करते हुए ग्वालियर में गुजरी महल का निर्माण कराया.
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राजा मानसिंह तोमर ने गुजरी महल को खास अपनी पत्नी मृगनयनी के लिए बनवाया था, जिसके लिए उन्होंने बेशुमार धन का उपयोग किया.
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राजा पहले से ही विवाहित थे. जिस महल में वे रहा करते थे, वहाँ अपनी दूसरी पत्नी को रखना उन्हें उचित नहीं लगा, इसलिए मृगनयनी को अपनी पत्नी का दर्जा देते हुए उन्होंने ग्वालियर किले के नीचे ही गुजरी महल का निर्माण कराया.
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महल निर्माण के लिए लाल बलुआ पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. महल में प्राचीन मूर्तियाँ, सिक्के, पेंटिंग देखने को मिल जाएँगे. महल को आज एक संग्रहालय की तरह उपयोग किया जाता है.
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इतिहासकार बताते हैं कि राजा और मृगनयनी की पहली मुलाकात जंगलों में हुई, जहाँ राजा शिकार खेलने पहुँचे थे. इस दौरान मृगनयनी ने राजा की जान बचाई थी और यह वही पल था जब राजा मानसिंह तोमर मृगनयनी पर मोहित हो गए.
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मृगनयनी अत्यधिक खूबसूरत थीं. साथ ही वे बहुत तेज और साहसी भी थीं, जिसने राजा को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. शादीशुदा होने के बावजूद उन्होंने मृगनयनी से विवाह करने की ठानी और अपनी पत्नी की सारी शर्तों को स्वीकार करते हुए गुजरी महल का निर्माण करवाया.
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मृगनयनी एक गुर्जर महिला थीं, जिनकी आँखें हिरणी जैसी सुंदर थीं. मृगनयनी की तीन शर्तों में से पहली शर्त को पूरा करते हुए 'गुजरी' नाम से महल का निर्माण हुआ. राजा ने बाकी की दो शर्तों को भी पूरा किया. कहते हैं कि यह महल ताजमहल के इतिहास से भी पुराना है.
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