शिक्षक के जुनून ने कर दिया स्कूल का कायाकल्प! बैठने के लिए फर्नीचर भी नहीं था, वहां आज हैं स्मार्ट क्लासेज

शिक्षक सुनील वर्मा के आने से ही उनके गांव में विद्यालय का रूप परिवर्तन हो सका. यहां तक कि शिक्षक छुट्टी के दिन भी खुद ही गेती-फावड़ा उठाकर निर्माण कार्य में मदद करते हैं

शिक्षक के जुनून ने कर दिया स्कूल का कायाकल्प! बैठने के लिए फर्नीचर भी नहीं था, वहां आज हैं स्मार्ट क्लासेज
स्कूल की स्थिति अन्य सरकारी स्कूलों के मुकाबले कई बेहतर है

राज किशोर सोनी/रायसेनः मध्य प्रदेश के रायसेन जिले स्थित एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक का जुनून पूरे शिक्षा विभाग को प्रेरणा दे रहा है. यहां गोहरगंज का शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय, जो एक समय तक बेहद ही खराब स्थिति में था. शिक्षक की इच्छाशक्ति और अथक प्रयासों के बाद उसकी कायाकल्प पूरी तरह से पलट गई. अन्य सरकारी स्कूलों के मुकाबले यह स्कूल कई बेहतर नजर आती है. 

2019 के पहले थी बदहाल स्थिति
2019 के पहले यह स्कूल पूरी तरह बदहाल स्थिति में था, बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर तक की सुविधा नहीं थी. लेकिन, मार्च 2019 में शिक्षक सुनील वर्मा की नियुक्ति गोहरगंज के माध्यमिक विद्यालय में कर दी गई. शिक्षक ने सबसे पहले तो खुद के वेतन से ही स्कूल में नवाचार करना शुरू कर दिया. फिर देखते ही देखते बाकी लोग भी मदद को आगे आए.

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स्टाफ ने जमा किए 1.40 लाख
शिक्षक के जुनून को देखते हुए धीरे-धीरे अन्य शिक्षक भी आगे आए और समस्त स्कूल स्टाफ ने मिलकर अपने-अपने वेतन का कुछ हिस्सा निकालकर करीब एक लाख चालीस हजार रुपये इकट्ठा कर लिए. इससे स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर खरीदा. शिक्षक के इंटरेस्ट को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक भी आगे आए और उन्होंने विधायक निधि से स्कूल को पांच लाख रुपये उपलब्ध करवाए. 

स्थापित कीं स्पोर्ट्स सुविधाएं
विधायक द्वारा दिए गए रुपयों से स्कूल में तार फेंसिंग, बिजली फिटिंग, कक्षाओं की अंदरूनी सजावट के साथ ही स्मार्टक्लास का निर्माण किया गया. इसके अलावा पेयजल व्यवस्था, शौचालय व्यवस्था, परिसर में पौधारोपण, बाउंड्री वॉल समेत, एक्यूप्रेशर टाइल्स भी लगाए गए. 

विधायक निधि से स्कूल में बैडमिंटन कोर्ट, वॉलीबॉल कोर्ट, कबड्डी, क्रिकेट ग्राउंड का निर्माण किया गया. इसके साथ ही विद्यालय की कक्षाओं में महापुरुषों के फोटो, अच्छे पर्दे और बैठने की तमाम बेहतर व्यवस्थाएं भी की गईं. 

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छुट्टी के दिन भी करते हैं काम
ग्रामीण बताते हैं कि शिक्षक सुनील वर्मा के आने से ही उनके गांव में विद्यालय का रूप परिवर्तन हो सका. यहां तक कि शिक्षक छुट्टी के दिन भी खुद ही गेती-फावड़ा उठाकर निर्माण कार्य में मदद करते हैं. यहां तक कि अपना वेतन भी स्कूल के नवाचार में ही खर्च करते हैं. 

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