पदोन्नति में आरक्षणः कर्मचारी संगठनों से भी बात करेगी मंत्रियों की कमेटी, तय किए जाएंगे नियम

मंत्री समूह कर्मचारी संगठनों अजाक्स (मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) और सपाक्स (सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय संगठन) और अन्य संगठनों के लोगों से भी चर्चा करेगा. 

पदोन्नति में आरक्षणः कर्मचारी संगठनों से भी बात करेगी मंत्रियों की कमेटी, तय किए जाएंगे नियम

प्रमोद शर्मा/भोपालः पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आगामी 10 अक्टूबर को आ सकता है. ऐसे में सरकार ने इसके लिए नियम आदि बनाने की तैयारी शुरू कर दी है. बता दें कि प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन देने के लिए प्रस्तावित नए नियमों पर मंत्री सूह की बैठक हुई. इस बैठक में पदोन्नति नियम 2002 और प्रस्तावित नवीन पदोन्नति नियम 2021 के प्रावधानों को लेकर चर्चा हुई. 

अजाक्स और सपाक्स का भी लिया जाएगा मत
सरकार पदोन्नति के प्रावधान तय करने से पहले विभिन्न कर्मचारी संगठनों का मत भी जानना चाहती है. यही वजह है कि मंत्री समूह कर्मचारी संगठनों अजाक्स (मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ) और सपाक्स (सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक समुदाय संगठन) और अन्य संगठनों के लोगों से भी चर्चा करेगा. उनका पक्ष जानने के बाद ही नियम तय किए जाएंगे. 

गौरतलब है कि पदोन्नति में आरक्षण के लिए तय की गई मंत्री समूह की बैठक में अनारक्षित पदों पर आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों के पदोन्नत होने, रोस्टर का पालन सहित अन्य मुद्दों के वैधानिक पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया. बैठक के दौरान सामान्य प्रशासन विभाग ने प्रावधानों को लेकर प्रस्तुतिकरण दिया.  

बता दें कि बीती 14 सितंबर को पदोन्नति में आरक्षण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में बहस हुई. इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार की ओर से विशेष अधिवक्ता मनोज गोरकेला ने कोर्ट में पक्ष रखा. सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का निर्देश दिया है और सभी पक्षों को दो सप्ताह में अपनी लिखित जवाब कोर्ट में पेश करने को कहा है. माना जा रहा है कि आगामी 10 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट पदोन्नति में आरक्षण मामले में अपना अंतिम फैसला दे सकता है. बता दें कि मध्य प्रदेश में साल 2016 से पदोन्नति बंद हैं. जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2002 को निरस्त कर दिया था, जिसके बाद से पदोन्नतियां नहीं हो पा रही हैं.