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नोटबंदी के बाद नगरीय निकाय बने मालामाल

500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों के बंद होने के बाद से जहां लोग परेशान हैं  तो दूसरी तरफ़ ये फ़ैसला नगरीय निकायों के लिए मालामाल करने वाला साबित हुआ है, पढ़िए पूरी ख़बर। 

नोटबंदी के बाद नगरीय निकाय बने मालामाल

ग्वालियर: 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद भले ही आम लोगों के लिए थोड़ी बहुत परेशानियां बढ़ गई हों लेकिन ये फैसला नगरीय निकायों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहा है।

नोट बंद करने के फैसले के महज तीन दिन के अंदर ग्वालियर नगर निगम को अपने बकाया टैक्स में से 3 करोड़ रुपए से ज्यादा मिल गए।

ये आंकड़ा आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। जो पैसा निगम को टैक्स के रूप में मिला है उसमें प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स शामिल है।

नगर निगम की मानें तो इतना टैक्स निगम को इतने दिन के अंदर पहले कभी भी नहीं मिला।

टैक्स की इस रकम को शहर की विकास योजनाओं पर खर्च किया जा सकेगा जिससे लोगों को मिलने वाली सुविधाओं में इजाफा होगा।

क्या है इसके पीछे की वजह?

ग्वालियर के मेयर विवेक शेजलवलकर का कहना है कि जिन लोगों ने अभी तक प्रॉपर्टी और वाटर टैक्स नहीं चुकाया था वो पुराने 500 और 1000 के नोटों के साथ अपना बकाया चुका रहे हैं।

क्योंकि निगम में सीधे पुराने नोट जमा कराना आसान है बजाय बैंक जाकर पहले नोट बदलवाना और फिर उन्हें निगम में जमा कराना।

लोग इसलिए भी जल्द टैक्स जमा करवा रहे हैं क्योंकि उन्हें टैक्स तो भरना ही है सो वो तय सीमा में टैक्स अदा कर देना चाहते हैं।