ग्वालियर: करोड़ों की लागत से संवारे थे पर्यटन स्थल, अब हुए बदहाली के शिकार

ये पूरी कवायद इसलिये की गई थी ताकि ग्वालियर तक बाहर के पर्यटकों को खींचा जा सके. लेकिन प्रशासन के ढीले रवैये के चलते ये सभी जगहें एक बार फिर बदहाली का शिकार हो गई हैं.

ग्वालियर: करोड़ों की लागत से संवारे थे पर्यटन स्थल, अब हुए बदहाली के शिकार
प्रशासन की लापरवाही से शहर के पर्यटन स्थलों की हालत बदतर होती जा रही है.

ग्वालियर: मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में प्रशासन की लापरवाही से शहर के पर्यटन स्थलों की हालत बदतर होती जा रही है. फूलबाग इलाके में 6 करोड़ की लागत से ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन विभाग ने सजाया संवारा था. ये पूरी कवायद इसलिये की गई थी कि ग्वालियर तक पर्यटकों को खींचा जा सके. लेकिन प्रशासन के ढीले रवैये के चलते ये सभी जगहें एक बार फिर बदहाली का शिकार हो गई हैं.

दरअसल, फूलबाग इलाके में बारादरी, जलविहार और बैजाताल तीन प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं, यह सभी सिंधिया महल का हिस्सा हुआ करते थे. बारादरी एक खुला हुआ रंगमंच है जहां कभी संगीत की महफिल सजती थी. लेकिन आज यहां शाम ढलते ही असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लग जाता है. वहीं देखरेख की कमी के चलते ये ऐतिहासिक स्थल कई जगह से टूट फूट रहा है.

वहीं पास से गुजरता है स्वर्णरेखा नाला. जिसमें सीवर का पानी बहाया जा रहा है, जो पर्यटक दिन में यहां पहुंचते भी हैं वह गंदगी और बदबू के चलते यहां खड़े तक नहीं हो पाते हैं.

जलविहार, जहां वर्तमान में महापौर का दफ्तर संचालित किया जाता है. इसके साथ ही बैजाताल है, जिसे खुला रंगमंच भी कहा जाता है. तालाब के बीचों-बीच तैरता रंगमंच है. इन सब जगहों पर पर्यटक ज्यादा से ज्यादा संख्या में पहुंचे और ऐतिहासिक धरोहरों के बारे में जाने, इसके लिए मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग द्वारा एक साल पहले करोड़ों खर्च किए गए थे. विभाग की ओर से कई आवश्यक काम भी करवाए गए. जिसके बाद इन सभी स्थलों की देखरेख की जिम्मेदारी नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की थी. लेकिन इनके द्वारा नहीं की गई, उसका परिणाम ये हुआ कि ये सभी स्थल एक बार फिर बदहाली का शिकार हो गए.

हालांकि इन सब जिम्मेदारियों को लेकर नगर निगम अपना पल्ला झाड़ता नजर आया. नगर निगम के कमिश्नर का कहना है कि इन ऐतिहासिक इमारतों को संवारने का काम पर्यटन विभाग द्वारा किया गया था, उन्हें यह बाद में हैंडोवर की गई. फिर भी वो अपने स्तर पर इन सबको एक बार फिर बेहतर करने का प्रयास करने में जुटे हुए हैं. वहीं यहां पहुंचने वाले पर्यटक बेहद ही निराश हैं उनका कहना है कि इतना पैसा खर्च होने के बावजूद भी जो रौनक यहां दिखनी चाहिए थी वह नहीं दिख रही है.