पेंड्रा: 'बैगा' जनजाति से PM आवास के नाम पर फर्जीवाड़ा, मिलीभगत से पैसा खा गए ठेकेदार

मामला गौरेला जनपद के 'बैगा' बाहुल्य ग्राम चूकतीपानी, करंगरा, साल्हेघोरी,  क्षेत्र का है, जहां विशेष संरक्षित जनजाति 'बैगा' निवास करती है. इन आदिवासियों के लिए 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत वर्ष 2016-17 में आवास स्वीकृत हुए थे. लेकिन इनके स्वीकृत आवास और इन्हें मिलने वाले रुपयों पर राजनीतिक रसूख रखने वाले ठेकेदारों की नजर लग गई और आज तक मकानों का निर्माण नहीं कराया जा सका.

पेंड्रा: 'बैगा' जनजाति से PM आवास के नाम पर फर्जीवाड़ा, मिलीभगत से पैसा खा गए ठेकेदार
सांकेतिक तस्वीर

दुर्गेश सिह बिसेन/पेंड्रा: छत्तीसगढ़ के गौरेला जनपद में राष्ट्रपति के 'दत्तक पुत्र' कहे जाने वाली 'बैगा' जनजाति से ''प्रधानमंत्री आवास योजना'' के नाम पर फर्जीवाड़ा करने का मामला सामने आया है. योजना के तहत 2016-17 में आवास स्वीकृत होने के बाद भी अभी तक निर्माण नहीं कराया गया. आवास नहीं बनने से 'बैगा' जनजाति के लोग परेशान होकर अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है.

मामला गौरेला जनपद के 'बैगा' बाहुल्य ग्राम चूकतीपानी, करंगरा, साल्हेघोरी,  क्षेत्र का है, जहां विशेष संरक्षित जनजाति 'बैगा' निवास करती है. इन आदिवासियों के लिए 'प्रधानमंत्री आवास योजना' के तहत वर्ष 2016-17 में आवास स्वीकृत हुए थे. लेकिन इनके स्वीकृत आवास और इन्हें मिलने वाले रुपयों पर राजनीतिक रसूख रखने वाले ठेकेदारों की नजर लग गई और आज तक मकानों का निर्माण नहीं कराया जा सका.

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बताया जाता है कि  ''प्रधानमंत्री आवास योजना'' के नाम पर अधिकारी और ठेकेदार आधा-अधूरा निर्माण करवाकर आवंटित राशि खा गए. जब 'बैगा' जनजाति के लोगों की बात किसी ने नहीं सुनी तो जनजाति के लोग थाने में FIR दर्ज कराई है . गौरेला थाने के टीआई रघुनंदन शर्मा के मुताबिक पैसे गबन करने के आरोप में 2 ठेकेदारों, शंकर सोनी और विष्णु सोनी के खिलाफ धारा 420, धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

मामले को लेकर हितग्राही प्रेम लाल 'बैगा' ने आरोप लगाया कि ''प्रधानमंत्री आवास योजना'' के तहत 2016-17  में आवास आवंटन किया गया था. लेकिन ठेकेदारों और अधिकारियों ने पैसा खा लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों ने आवास बनवाने के लिए उनसे 48-48 हजार रुपए की 2 किस्त भी अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए. लेकिन आवास नहीं बनने पर जब ठेकेदारों से मांगा गया तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया. मामले की जांच के लिए उन्होंने इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों को भी की, लेकिन अधिकारी जांच करने तक नहीं आए. प्रेम लाल ने कहा कि आवास नहीं बनने की वजह से वे कच्चे घरों में रहने को मजबूर हैं.

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गांव के पंच भारत राम पैकरा ने बताया कि ''प्रधानमंत्री आवास योजना'' के नाम पर 2016-17 में काम शुरू हुआ था. लेकिन ठेकेदारों और अधिकारियों ने काम को अधूरा ही छोड़ दिया. जब इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की गई तो उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया. आवास निर्माण नहीं होने की वजह से 'बैगा' जनजाति के लोग मिट्टी के घरों में रहने को मजबूर हैं.

मिलीभगत से संभव हुआ फर्जीवाड़ा
''प्रधानमंत्री आवास योजना'' के नाम पर हितग्राहियों को 1 लाख 20 हजार रुपए की राशि मिलती है. ये राशि 3 किश्तों में दी जाती है. पहली किश्त में 48 हजार रुपए आवास की शिला रखने के लिए दी जाती है, जबकि दूसरी किश्त में 48 हजार रुपए दीवारें और लिंटर के लिए दिया जाता है और तीसरी किश्त में भी 48 हजार रुपए मकान की पेंटिंग सहित खिड़की दरवाजों के लिए दी जाती है. साथ ही ये राशि तभी आवंटित की जाती है, जब निर्माण हो रहे आवास की फोटो अपलोड की जाती है.

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ऐसे में सवाल उठता है कि या तो अधिकारी मौके पर मुआयना करने नहीं गए या फिर ठेकेदारों से जियो टैगिंग कर फर्जी फोटोग्राफ्स लगाकर रुपए रिलीज करवा दिए. इस संबंध में स्थानीय कर्मचारियों ने अधिकारियों को शिकायत भी की, लेकिन अधिकारियों के कानों में जू तक नहीं रेगी और मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया.

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