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मध्य प्रदेश: बच्चों में पढ़ाई के प्रति जागे रुचि, इसलिए स्कूल को दे दी ट्रेन की शक्ल

जिला शिक्षाधिकारी इस प्रयोग को अभिनव बताते हुए रेलगाड़ी वाले स्कूल के शिक्षकों की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं साथ ही जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में भी इस तरह के प्रयोग करने की बात कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश: बच्चों में पढ़ाई के प्रति जागे रुचि, इसलिए स्कूल को दे दी ट्रेन की शक्ल

डिंडौरीः मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में एक सरकारी स्कूल रेलगाड़ी में चल रही है. रेलगाड़ी में स्कूल सुनकर आप जरूर हैरान हो गए होंगे, लेकिन यह बिलकुल सच है. दरअसल, खजरी गांव में माध्यमिक स्कूल को रेल की तर्ज़ पर सजाया और सवारा गया है. रेल के कोच की तरह स्कूल के कमरों को S-1, S-2 और स्कूल को एजुकेशन एक्सप्रेस का नाम दिया गया है. स्कूल को रेल की शक्ल दिए जाने के बाद से जो बच्चे स्कूल नहीं आते थे, वे भी रोजाना स्कूल आने लगे हैं. वहीं आसपास के ग्रामीण जिन्होंने कभी रेल नहीं देखी है, वह भी स्कूल पहुंचकर रेल न देख पाने की कसर को पूरा कर रहे हैं. 

आपको बता दें कि प्रदेश का आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिला आजतक किसी भी रेल लाइन से नहीं जुड़ पाया है लिहाजा ग्रामीण इलाकों में आज भी ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी रेल देखा ही नहीं है. खजरी गांव के माध्यमिक शाला परिसर में हरे भरे पौधे, फूल, फेंसिंग और साफ-सफाई, रेलगाड़ी वाले इस स्कूल की खूबसूरती में चार चांद लगा रहे हैं. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे और ग्रामीण स्कूल को धरोहर बताते हुए गौरांवित महसूस कर रहे हैं. छात्र बताते हैं कि उन्होंने भी कभी रेल नहीं देखा है और स्कूल को रेलगाड़ी बनाये जाने के बाद उनका पढाई में मन भी लग रहा है.

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स्कूल की साफ-सफाई और पौधों को पानी देने का काम छात्र पूरी ईमानदारी से करते हैं वहीं कुछ अलग करने की चाहत में स्कूल को रेलगाड़ी बनाने वाले शिक्षकों ने बताया कि स्कूल को सजाने और संवारने के लिए उन्होंने अपने वेतन से भी रूपये खर्च किये हैं ताकि गरीब आदिवासी बच्चे मन लगाकर पढ़ सकें. वहीं स्कूल के चर्चे सुनकर बच्चे तो बच्चे बड़े बुजुर्ग भी रेलगाड़ी वाले स्कूल को देखने दूर दूर से पहुंच रहे हैं. 

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यहां पहुंचने वाले ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कभी रेल नहीं देखा है और जबसे उन्हें इस स्कूल के बारे में जानकारी लगी है, वह रेल देखने के बहाने स्कूल पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो शिक्षकों के इस प्रयोग से बच्चे रोज स्कूल जाने लगे हैं और अब उनका मन पढाई में लगने लगा है. वहीं जिला शिक्षाधिकारी इस प्रयोग को अभिनव बताते हुए रेलगाड़ी वाले स्कूल के शिक्षकों की जमकर तारीफ करते नजर आ रहे हैं साथ ही जिले के अन्य सरकारी स्कूलों में भी इस तरह के प्रयोग करने की बात कर रहे हैं.