दिग्विजय से 2003 में शिवराज हार गए थे चुनाव, जानें फिर कैसे तय किया सीएम तक का सफर

2003 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश में दो-तिहाई सीटें पाकर सत्ता की कुर्सी पाई थी.

दिग्विजय से 2003 में शिवराज हार गए थे चुनाव, जानें फिर कैसे तय किया सीएम तक का सफर
14 दिसंबर 2013 को शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार बने प्रदेश के मुखिया.

भोपाल: मध्य प्रदेश में वर्ष 2003 से शुरू हुई बीजेपी की सत्ता बीते 15 सालों से निर्बाध जारी है. वहीं, प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज सिंह चौहान ने 13 साल पूरे कर लिए हैं. राजनीति में उदारवादी चेहरे के रूप में खुद को स्थापित करने वाले शिवराज सिंह को पहली बार नवंबर, 2005 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी. इससे पहले 2003 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ राघौगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था. हालांकि, उस समय वह चुनाव हार गए थे. कहा जाता है कि इस विधानसभा चुनाव में दिग्विजय सिंह की साख बचाने के लिए उनके पूरे परिवार को चुनावी मैदान में उतरना पड़ा था.

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2003 में दो-तिहाई सीटें जीतकर सत्ता में आई थी बीजेपी 
2003 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश में दो-तिहाई सीटें पाकर सत्ता की कुर्सी पाई थी. वह चुनाव बीजेपी की फायर ब्रांड नेता रहीं उमा भारती के नेतृत्व में लड़ा गया था. मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद एक मामले में अदालत ने उमा के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी किया था. इसके चलते 23 अगस्त 2004 को उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था. इसके बाद सीएम पद पर मध्य प्रदेश बीजेपी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने शपथ ली. एक साल से कुछ माह ऊपर होते ही प्रदेश में बीजेपी ने एक बार फिर नेतृत्व में बदलाव कर शिवराज सिंह चौहान को सीएम की कुर्सी पर बैठा दिया.   

अटल जी की लोकसभा सीट से पांच बार चुने गए सांसद
शिवराज 1990 में पहली बार विधायक बने थे. वहीं, 1991 में ही उनको पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की खाली सीट विदिशा से लोकसभा जाने का मौका मिला था. शिवराज इस लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद रहे. गौरतलब है कि वर्तमान में विदिशा लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कर रही हैं.

बुधनी विधानसभा सीट को बनाया बीजेपी अजेय गढ़
शिवराज सिंह चौहान ने सीएम पद संभालने के बाद बुधनी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीत हासिल की थी. वर्ष 2008 में शिवराज ने बुधनी सीट पर फिर से बीजेपी का परचम लहराया. उन्होंने 41,525 मतों के अंतर से यह चुनाव जीता था. वहीं, 2013 के विधानसभा चुनाव में बुधनी सीट पर 84,805 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी. शिवराज का पहला सीएम कार्यकाल तीन साल का रहा था. 12 दिसंबर, 2008 में उनका दूसरा कार्यकाल शुरू हुआ. वहीं, 14 दिसंबर 2013 को वह तीसरी बार प्रदेश के मुखिया बने.

मध्य प्रदेश चुनाव 2013 का परिणाम 
2013 के पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 165 सीटों पर जीत हासिल की थी. 2008 के मुकाबले 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 22 सीटों का लाभ हुआ था. वहीं, कांग्रेस ने 58 सीटों पर जीत दर्ज की थी. 2008 के पिछले चुनाव के मुकाबले कांग्रेस को 13 सीटों का नुकसान हुआ था. 2013 चुनाव में बीएसपी को 4 सीट और 3 निर्दलीय प्रत्याशियों को जीत मिली थी. इस चुनाव में बीजेपी को 44.88 फीसदी और कांग्रेस को 36.38 फीसदी वोट मिले थे.