छत्तीसगढ़ में चलती है इस पूर्व विधायक की दबंगई, चुनाव हारने के बाद भी कर रखा है सरकारी बंगले पर कब्जा

विपक्ष ने कई बार बंगला खाली कराने के लिए कोशिश की. लेकिन, बावजूद इसके पूर्व विधायक का कब्जा बरकरार रहा.

छत्तीसगढ़ में चलती है इस पूर्व विधायक की दबंगई, चुनाव हारने के बाद भी कर रखा है सरकारी बंगले पर कब्जा
रेणुका सिंह के चुनाव हारे चार साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन आज भी सरकारी आवास में उनका कब्जा बरकरार है

रायपुर/सूरजपुर: प्रदेश की रमन सरकार अतिक्रमण को लेकर हमेशा गंभीर नजर आती है. लेकिन जब बात उनके ही पूर्व विधायक की हो तो सारे नियम को नजरअंदाज कर दिया जाता है. ताजा मामला सूरजपुर का है जहां लगातार विवादों में रहने वाली पूर्व मंत्री और दो बार विधायक रह चुकी रेणुका सिंह के चुनाव हारे चार साल से ज्यादा हो चुका है लेकिन आज भी सरकारी आवास में उनका कब्जा बरकरार है. विपक्ष के द्वारा कई बार मकान खाली करने के लिए प्रयास किए गए लेकिन पूर्व विधायक आज भी सरकारी आवास छोड़ने को तैयार नहीं हैं.

जिसके नाम आवंटित हुआ सरकार बंगला वह रहता है निजी आवास में
रेणुका सिंह के इस आवास को लोग 'सवेरा' के नाम से जानते हैं. दरअसल, यह आवास प्रेमनगर विधायक के लिए राज्य सरकार की ओर से आवंटित किया गया है. लेकिन, प्रेमनगर के विधायक खेल साय आज भी अपने निजी आवास पर रहते हैं और इस आवास में रहती हैं प्रेमनगर की पूर्व विधायक और प्रदेश सरकार की पूर्व महिला एवं बाल विकास मंत्री रेणुका सिंह.

चुनाव हारने के बाद भी लिखा है 'विधायक'
रेणुका सिंह लगातार विवादों में रही हैं और विवादों के ही कारण इनका मंत्री पद भी जा चुका है. इनका रुतबा भी ऐसा है कि अच्छे-अच्छे भी इनसे कुछ बोलने से डरते हैं. शायद यही कारण है कि चुनाव हारने के बाद भी सरकारी आवास पर इनका कब्जा बरकरार है. आलम यह है कि चुनाव हारने के बाद भी आज उनके सरकारी आवास पर विधायक प्रेमनगर लिखा हुआ है. गाड़ी में हूटर लगा हुआ है. हालांकि उनके सोशल मीडिया एकाउंट पर जरूरी 'पूर्व मंत्री (विधायक)' लिखा हुआ है.

जी मीडिया के सवाल पर ये बोलीं पूर्व विधायक
जी मीडिया ने जब उनसे सरकारी आवास पर कब्जे का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में उनके दो निजी बंगले हैं लेकिन वहां अदानी कोयला खदानों के लिए भारी वाहनों से ट्रांसपोर्टिंग होती है. जिसके कारण बहुत प्रदूषण होता है. इसलिए उन्होंने सूरजपुर के सरकारी आवास पर अपना कब्जा कर रखा है. उनके अनुसार उस इलाके में यदि वह रहेंगीं तो वे मर जायेंगी. लेकिन, सवाल यह है कि आखिर उस इलाके के ग्रामीण वहां कैसे जी रहे हैं. और यदि वहां जिंदगी इतनी मुश्किल है तो प्रदेश में उनकी सरकार है वे इन खदानों को बंद कराने या स्थानीय लोगों को प्रदूषण से मुक्ति दिलाने के लिए क्या पहल कर रही हैं.

विपक्ष ने भी कई बार की बंगला खाली कराने की कोशिश
विपक्ष ने कई बार बंगला खाली कराने के लिए कोशिश की. लेकिन, बावजूद इसके पूर्व विधायक का कब्जा बरकरार रहा. जिसको लेकर कांग्रेस लगातार पूर्व विधायक और राज्य सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगा रही है. इसके साथ ही कांग्रेस अदानी को लेकर भी राज्य सरकार को घेरने का काम कर रही है.

यह मामला खड़ा कर रहा है अहम सवाल
इस पूरे मामले में दो बड़े सवाल हैं जिसका जवाब सब जानना चाहते हैं... पहला यदि कोई आम आदमी अतिक्रमण करे तो उसके लिए कई नियम-कानून हैं लेकिन यदि कोई ओहदे वाला व्यक्ति अवैध कब्जा करे तो क्या उसके लिए कोई कानून नहीं है? दूसरा सवाल यह कि यदि इलाके में कोयले का इतना डस्ट है कि पूर्व मंत्री यदि उस इलाके में रहेंगी तो वे मर जायेंगी तो आखिर उस इलाके के लाखों बच्चों, बुजुर्गो और महिलाओं की स्थिति क्या है? इस ओर कोई ध्यान क्यों नहीं दे रहा है? और उन ग्रामीणों को इस जहर से निजात दिलाने के लिए कोई पहल क्यों नहीं की जा रही है?