East-West Dedicated Freight Corridor: रेल बजट में सूरत (गुजरात) से डानकुनी (पश्चिम बंगाल) तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) की घोषणा हुई है, जिसके बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अब विस्तार से जानकारी दी है.
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East-West Dedicated Freight Corridor: रेलवे ट्रैक पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे लगातार काम कर रहा है और इसी के तहत नए-नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) का लगातार निर्माण किया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल विशेष रूप से केवल माल ढुलाई के लिए किया जाता है. हाई-स्पीड और उच्च क्षमता वाले डिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के निर्माण से नॉर्मल रेल ट्रैक पर लोड कम हो जाता है और नई ट्रेनें चलाने में आसानी होती है. अब इसी के तहत एक नया ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की घोषणा की गई है, सूरत (गुजरात) से डानकुनी (पश्चिम बंगाल) के बीच बनाया जाएगा.
MPCG से गुजरेगा 2052KM का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर
गुजरात के सूरत से पश्चिम बंगाल के डानकुनी के बीच बनने वाले इस ईस्ट-वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) की लंबाई करीब 2052 किलोमीटर है. यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल से शुरू होकर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र होते हुए गुजरात तक जाएगा. इस कॉरिडोर के बनने से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को सीधा फायदा होगा. ईस्ट–वेस्ट कॉरिडोर की वजह से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक बड़ा इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित होगा.
कॉरिडोर से मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ को क्या-क्या फायदे?
भारतीय रेलवे ने जब से सूरत (गुजरात) से डानकुनी (पश्चिम बंगाल) तक नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) की घोषणा की है. इस बात की चर्चा हो रही है कि आखिर मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को इसका क्या फायदा होगा. अब रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विस्तार से इसकी जानकारी दी है और बताया है कि दोनों राज्यों में इकोनॉमिक कॉरिडोर विकसित होने के साथ ही इस कॉरिडोर के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर मौजूद बंदरगाहों से जुड़ जाएंगे.
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इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा, 'यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल से शुरू होकर ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र होते हुए गुजरात तक जाएगा. महाराष्ट्र और गुजरात के अलावा मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के अंदरूनी इलाकों में मौजूद कई इंडस्ट्रीज को फायदा मिलेगा, जिनमें स्टील प्लांट, पावर प्लांट, खदानें और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट शामिल हैं. इस कॉरिडोर से पूरे क्षेत्र की इंडस्ट्री का कंटेनर, बल्क और कार्गो मूवमेंट एक समर्पित ट्रैक पर आएगा, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और ट्रांजिट टाइम कम होगा.
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मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में तैयार माल आसानी से पहुंचेगा विदेश
सूरत और डानकुनी के बीन बनने वाले इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के उद्योगों की तरक्की को रफ्तार मिलेगी. इस हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के जरिए मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ कई शहर सीधे पूर्वी और पश्चिमी तटों पर मौजूद बंदरगाहों से जुड़ जाएंगे. इससे एमपी और छत्तीसगढ़ के उद्योगों को बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तैयार होने वाले माल को आसानी से विदेश तक पहुंचाने का रास्ता सुलभ हो जाएगा.