दो साल पहले मान ली होती बात तो नहीं भागते आतंकी!

भोपाल सेंट्रल जेल तोड़कर भागने वाले सिमी के आतंकियों ने एक मुख्य प्रहरी की हत्या कर दी थी हालांकि जेल ब्रेक की इस घटना को रोका जा सकता था, जानिए कैसे?

दो साल पहले मान ली होती बात तो नहीं भागते आतंकी!

भोपाल: सेंट्रल जेल ब्रेक मामले की NIA जांच चल रही है।

लेकिन इसी बीच सिस्टम की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है।

दरअसल दो साल पहले ही जेल ब्रेक की आशंका जता दी गई थी।

आशंका भी किसी और ने नहीं बल्कि जेल की सुरक्षा में कमियों को नज़दीक से देखने वाले तत्कालीन एडिशनल आईजी ने जताई थी।

रिटायर होने के बाद जीके अग्रवाल ने 2014 में प्रमुख सचिव को चिट्ठी लिखी थी।

जिसमें साफ़-साफ़ कहा गया था कि भोपाल जेल की सुरक्षा भगवान भरोसे है।

रिटायर्ड एआईजी ने चिट्ठी में लिखा था कि जेल में सिमी के आतंकी बंद हैं।

उनकी मुलाकात की व्यवस्था, जेल भवन की संरचना, सुरक्षा की अविवेकपूर्ण व्यवस्था के बावजूद अगर भोपाल जेल में कोई बड़ी दुर्घटना नहीं घटी, तो ये मानना भूल होगी, कि व्यवस्थाएं उत्तम है।

उन्होंने यहां तक कहा था कि ईश्वर मदद रहा है, लेकिन सदैव मदद करता ही रहेगा ऐसा सोचना भूल होगी।

लेकिन उनकी इस चिट्ठी को किसी ने तवज्जो नहीं दी और नतीजा क्या हुआ ये सबके सामने है। 

कांग्रेस ने साधा निशाना

मध्य प्रदेश कांग्रेस ने रिटायर्ड एआईजी के दो साल पुराने ख़त को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं।

कांग्रेस के मुताबिक अगर दो साल पहले ही अफसर ने आशंका जताई थी, तो कॉन्स्टेबल रमाशंकर की मौत के लिए सरकार ज़िम्मेदार है।

क्योंकि वो जेल प्रशासन की लापरवाही के शिकार हुए हैं।

कांग्रेस ने जेलब्रेक और एनकाउंटर मामले की एक साथ जांच की मांग की है।