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सरकार के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' और 'सड़क-पुलिया निर्माण' के दावों की हकीकत सागर जिले के रहली जनपद में खुलकर सामने आ गई है. यहां विकास के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है और नतीजा यह है कि मासूम छात्राएं हर रोज मौत के मुंह से गुजरकर स्कूल पहुंचने को मजबूर हैं. रहली जनपद क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेरखेरी कलां में कोपरा नदी पर बनी पुलिया लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी है. मानसून में नदी का जलस्तर बढ़ते ही यह पुलिया पूरी तरह डूब जाती है. इसके बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला. इन हालातों को बयान करता एक वीडियो सामने आया है जिसे देखकर आप असलियत का अंदाजा खुद ब खुद कर लेंगे.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि स्कूली पोशाक पहने छात्राएं उफनते पानी और तेज बहाव के बीच बेहद सावधानी से नदी पार कर रही हैं. जरा सी फिसलन भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है. इस खतरनाक सफर में ग्रामीण खुद पानी में उतरकर एक-एक कर मासूम छात्राओं का हाथ पकड़कर उन्हें सुरक्षित दूसरे किनारे तक पहुंचा रहे हैं.
3 किलोमीटर के अतिरिक्त चक्कर की मजबूरी
यह रास्ता सिर्फ बेरखेरी कलां ही नहीं, बल्कि पास स्थित चेनपुरा गांव के दर्जनों विद्यार्थियों के लिए भी स्कूल पहुंचने का मुख्य मार्ग है. ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगभग 3 किलोमीटर का एक अन्य वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध है, लेकिन रोज इतनी लंबी दूरी पैदल तय करना छोटे बच्चों के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि ठेकेदार और संबंधित विभाग द्वारा मरम्मत के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की गई है, जिसके चलते पुलिया की स्थिति जस की तस बनी हुई है.
CEO बोले- जांच के निर्देश दिए
मामले की गंभीरता पर रहली जनपद के सीईओ रवि पाटीदार ने कहा, 'यह मामला हमारे संज्ञान में आया है. इस संबंध में हमने अपने सहायक यंत्री को मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं. फील्ड विजिट और निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर जैसा भी आवश्यक होगा, हम आगे की कार्रवाई करेंगे और बच्चों के आवागमन के लिए सुरक्षित व्यवस्था करवाएंगे.' उन्होंने आगे बताया कि वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं. जल्द ही क्षतिग्रस्त पुलिया के निर्माण को लेकर संबंधित एजेंसी से बात की जा रही है.
'विकसित मध्य प्रदेश' मॉडल पर उठ रहा सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिया सालों से टूटी है. ठेकेदार द्वारा काम के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है, लेकिन मरम्मत आज तक नहीं हुई. ग्रामीणों की एक ही मांग है कि विद्यार्थियों और आम जनता की सुरक्षा को देखते हुए पुलिया की तुरंत मरम्मत कराई जाए. वरना किसी अप्रिय घटना के बाद प्रशासन की नींद खुलेगी. बारिश के मौसम में बच्चों की जान दांव पर लगाकर स्कूल भेजना क्या यही 'विकसित मध्य प्रदेश' का मॉडल है? बेरखेरी कलां की यह तस्वीर सरकारी तंत्र की लापरवाही और विकास के खोखले दावों की सबसे बड़ी गवाही बन गई है.