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दीपावली के बाद कमलनाथ सरकार के मंत्री ने दागा 'भूरिया बम', कांग्रेस में आया सियासी भूचाल

सीएम कमलनाथ दिल्ली में है. 2 नवंबर को सोनिया गांधी ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी और महासचिवों की मीटिंग बुलाई है.

दीपावली के बाद कमलनाथ सरकार के मंत्री ने दागा 'भूरिया बम', कांग्रेस में आया सियासी भूचाल
बैठक में एमपी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया सोनिया गांधी से पीसीसी चीफ और भूरिया की भूमिका पर चर्चा कर सकते हैं.

भोपाल: झाबुआ उपचुनाव से विधायक बने कांग्रेस के सीनियर आदिवासी लीडर कांतिलाल भूरिया अब प्रदेश में सियासी भूचाल की वजह बन रहे हैं. विधायक बनने के बाद भूरिया के एडजस्टमेंट को लेकर कयास लगाए ही जा रहे थे कि कमलनाथ सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने 'भूरिया बम' फोड़ दिया है. सज्जन सिंह वर्मा ने कांतिलाल भूरिया को पीसीसी चीफ बनाने की मांग उठा दी है. कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हुआ, तो बीजेपी ने ही इसमें नया तड़का दे दिया है. बीजेपी ने कहा कि कमलनाथ खेमे के खास सिपहसलार सज्जन ने ये मुद्दा इसलिए उछाला है, ताकि आदिवासी नेता भूरिया का नाम उठते ही सिंधिया का दावा कमजोर पड़ जाए.
 
भूरिया मनमोहन सरकार के वक्त केंद्र में मंत्री रह चुके हैं. इससे पहले वे एमपी सरकार में भी मंत्री थे. वे पीसीसी चीफ की भूमिका भी निभा चुके हैं. मध्य प्रदेश में आदिवासियों के प्रमुख चेहरे के तौर पर कांतिलाल भूरिया का ही एकमात्र सबसे बड़ा चेहरा प्रोजेक्ट किया जाता है. भूरिया विधायक बनने के बाद अब ये चर्चाएं तेजी से चल रही है कि उनकी जिम्मेदारी क्या होगी. सबसे बड़ी संभावना उनके कैबिनेट मंत्री के तौर पर देखी जा रही थी. लेकिन सज्जन सिंह वर्मा ने उनके लिए एक नयी और बड़ी जिम्मेदारी की मांग कर दी है. इस मांग के बाद ये तो तय हो गया है कि भूरिया को सरकार केवल विधायक बैठाकर रखने के मूड में कतई नहीं हैं. 

बीजेपी ने लगाया तड़का
बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने इसमें एक नया तड़का दिया है. उन्होंने कहा कि ये सब ज्योतिरादित्य सिंधिया का दावा कमजोर करने की साजिश है. सब जानते हैं कि कमलनाथ और दिग्विजय खेमे को सिंधिया के पीसीसी चीफ बनने से परेशानी हो सकती है. इसलिए उन्हें दूर रखने के लिए कद्दावर आदिवासी नेता कांतिलाल भूरिया का नाम उछाला जा रहा है. हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता रवि सक्सेना बीजेपी को सलाह देते हैं कि वो कांग्रेस के अंदरूनी मामलों में मशविरा नहीं दे. झाबुआ की हार के बाद बीजेपी में उठ रही राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष से हटाने की मांग पर गौर करना चाहिए. सक्सेना ने कहा कि फिलहाल कमल नाथ पीसीसी चीफ की भूमिका निभा रहे हैं और नया पीसीसी चीफ सोनिया गांधी वक्त आने पर घोषित कर देंगी.

अहम है सज्जन की टाइमिंग
सज्जन सिंह को मालूम था कि दीपावली के बाद पीसीसी चीफ को लेकर चर्चाएं गर्म होंगी. इसी दौरान भूरिया के एडजस्टमेंट पर भी चर्चा होगी. सीएम कमलनाथ जब दिल्ली में इस मु्ददे पर कोई चर्चा करें, तो उन्हें भूरिया को पीसीसी चीफ बनाने का एंगल भी ध्यान रहना चाहिए. दरअसल, भूरिया को दिग्विजय का भरोसेमंद समझा जाता है. लेकिन झाबुआ उपचुनाव में भूरिया को जिताने के लिए कमलनाथ ने केवल दिग्गी खेमे पर भरोसा नहीं करके पूरी गंभीरता दिखाई. चुनाव वैसे ही लड़ा गया जैसे कमल नाथ छिंदवाड़ा में लड़ते हैं. 

भूरिया को ये एहसास भी होगा कि उनके उपचुनाव में सिंधिया खेमे ने पर्याप्त दूरी बनाई और औपचारिकता ही निभाई थी. सिंधिया तो एक बार भी प्रचार के लिए नहीं पहुंचे. सिंधिया अपना समर्थन भूरिया विरोधी जेवियर मेढ़ा को देते रहे हैं, इसलिए भूरिया को भी सिंधिया और कमलनाथ में से एक में आस्था दिखानी होगी तो वे कमलनाथ को ही चुनेंगे. राजनैतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चाएं हैं कि अभी सरकार में गुटबाज़ी नुकसान पहुंचाने के स्तर पर नहीं है. लेकिन सिंधिया पीसीसी चीफ बनेंगे तो वे पार्टी दफ्तर में सक्रियता बढ़ाएंगे. ऐसे में युवा और आक्रामक शैली के सिंधिया अपनी मौजूदगी का एहसास कराएंगे तो कमलनाथ के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं. वे पहले ही अपने बयानों के जरिए सरकार के लिए मुसीबत खत्म करने की बजाय सरकार के लिए मुसीबत बनाने की वजह ज़रूर बन चुके हैं.

आने वाला वक्त काफी अहम
सीएम कमलनाथ दिल्ली में है. 2 नवंबर को सोनिया गांधी ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी और महासचिवों की मीटिंग बुलाई है. जाहिर बात है, प्रदेशों की भूमिका पर अहम चर्चा होने वाली है. इस बैठक में एमपी कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक बावरिया सोनिया गांधी से पीसीसी चीफ और भूरिया की भूमिका पर चर्चा कर सकते हैं. कमलनाथ इससे पहले सोनिया के करीबियों तक अपना संदेश और पक्ष पहुंचा सकते हैं. ऐसे में नए पीसीसी चीफ या मंत्री मंडल विस्तार समेत भूरिया की भूमिका जैसे मुद्दों पर फैसले में उनकी राय को शामिल किया जा सकता है.