छत्तीसगढ़: 'सारकेगुड़ा' फर्जी मुठभेड़ का वो मामला, जिससे आज भी लोगों को लगता है डर

रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने बैठक में शामिल लोगों पर एक तरफा हमला किया. जिसकी वजह से कई लोग मारे गए और घायल हुए.

छत्तीसगढ़: 'सारकेगुड़ा' फर्जी मुठभेड़ का वो मामला, जिससे आज भी लोगों को लगता है डर
रिपोर्ट कहती है कि गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों से मारपीट की.अगली सुबह एक व्यक्ति रमेश के घर घुसकर उसे भी मार डाला.

बीजापुर: छत्तीसगढ़ की भूपेश सरकार को करीब एक महीने पहले सारकेगुड़ा आयोग ने रिपोर्ट सौंप दी थी. वहीं, अब इस रिपोर्ट के कई तथ्य लीक हो गए हैं. वहीं, अब सारकेगुड़ा आयोग की रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश की जा सकती है. वहीं, विधानसभा में इस रिपोर्ट को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं. दरअसल, बीजापुर के सारकेगुड़ा में 28 जून 20112 को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में 17 नक्सलियों को मार गिराया था. वहीं, इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि मुठभेड़ में मारे गए लोग नक्सली नहीं थे. 

सारकेगुड़ा फर्जी मुठभेड़ मामले में एकल सदस्सीय जस्टिस वीके अग्रवाल न्यायिक जांच आयोग ने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है. बस्तर के सारकेगुड़ा में वर्ष 2012 में हुए सारकेगुडा फर्जी मुठभेड़ मामले में आयोग ने सात आदिवासी बच्चों समेत 17 लोगों की हत्या के लिए सुरक्षा बलों को दोषी ठहराया गया है.

सारकेगुड़ा फर्जी मुठभेड़ मामला
सारकेगुड़ा में 28-29 जून 2012 की रात वहां के आदिवासी बीज पंडुम त्योहार मनाने के लिए रात में एक खुले मैदान में जमा होकर बैठक कर रहे थे. इसी दौरान सुरक्षाबलों ने उन्हें घेरा और चारों तरफ से फायरिंग करके आदिवासियों को भून दिया था. बाद में पुलिस व सुरक्षाबलों ने दावा किया था कि घने जंगल में गश्त करते हुए उन्हें अचानक नक्सली मिले जो बैठक कर रहे थे. उन्हीं नक्सलियों ने गोलीबारी शुरु की जिससे हमारे 6 सुरक्षाकर्मी घायल हो गए. सुरक्षा बलों का कहना था कि उन्होंने आत्मरक्षा के रात में फायरिंग की जिसमें सारी मौतें हुईं. लेकिन, आयोग ने जांच में पाया कि सुरक्षाबलों द्वारा बताई गई ये कहानी झूठी है.

रिपोर्ट के मुताबिक- एकतरफा था हमला
रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा बलों ने बैठक में शामिल लोगों पर एक तरफा हमला किया. जिसकी वजह से कई लोग मारे गए और घायल हुए. बैठक में शामिल लोगों ने कोई फायरिंग नहीं की. गोलीबारी की घटना के बाद सुरक्षाबलों ने ग्रामीणों से मारपीट की.अगली सुबह एक व्यक्ति रमेश के घर घुसकर उसे भी मार डाला. रिपोर्ट कहती है कि इस घटना की जांच में पुलिस ने भी गड़बड़ी की. यह प्रमाणित नहीं किया कि कोई मृतक या घायल ग्रामीण नक्सली था या किसी नक्सली ने बैठक में हिस्सा लिया था.