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मध्य प्रदेश में फिर शुरू हो सकता है सवर्ण आंदोलन, कमलनाथ सरकार को मिली चेतावनी

सवर्ण वर्ग के नेता सुनील पटेरिया ने कहा कि जब किसी भी व्यक्ति पर एससी/एसटी एक्ट का गलत प्रयोग किया जाएगा, तो वह मदद मांगने कहां जाएगा.

मध्य प्रदेश में फिर शुरू हो सकता है सवर्ण आंदोलन, कमलनाथ सरकार को मिली चेतावनी
सवर्ण वर्ग के नेता बुधवार को प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन से मुलाकात कर एक ज्ञापन भी सौंपेंगे.

ग्वालियर: मध्य प्रदेश के ग्वालियर चंबल संभाग में एक बार फिर से सवर्ण आंदोलन की सुगबुगाहट सुनाई देने लगी है. सवर्ण वर्ग के लोगों की मानें, तो वह जल्द ही प्रदेश सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरने वाले हैं. इसके पीछे मुख्य कारण है कि विधानसभा चुनाव के दौरान जिस तरीके से कांग्रेस पार्टी ने सवर्णों से वचन पत्र के माध्यम से जो वादे किए थे, वह निभाने में सरकार असमर्थ नजर आ रही है. सवर्ण वर्ग के नेताओं का कहना है कि उनकी पहली मांग है कि मध्य प्रदेश में सवर्ण आयोग का गठन किया जाए.

सवर्ण वर्ग के नेता सुनील पटेरिया ने कहा कि जब किसी भी व्यक्ति पर एससी/एसटी एक्ट का गलत प्रयोग किया जाएगा, तो वह मदद मांगने कहां जाएगा. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल की हिंसा के दौरान मध्यप्रदेश सरकार दलितों पर लगाए गए मुकदमे वापस ले रही है. लेकिन, सवर्णों पर लगाए गए मुकदमे वापस क्यों नहीं ले रही है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण सवर्णों को दिया गया है. वह केवल नौकरी और शिक्षा में लागू न होते हुए सभी स्तर पर लागू होना चाहिए.

 

इन मांगों को लेकर सवर्ण वर्ग के नेता बुधवार को प्रदेश के गृहमंत्री बाला बच्चन से मुलाकात कर एक ज्ञापन भी सौंपेंगे. उनका कहना है कि यदि सरकार की तरफ से उचित आश्वासन नहीं मिला, तो आने वाले समय में सवर्ण वर्ग अपनी मांग मनवाने के लिए एक बार फिर उग्र आंदोलन करने पर विवश होगा. 

वहीं, इस मामले में कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता आरपी सिंह का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने जो वादे वचन पत्र के माध्यम से सवर्ण वर्ग से किए थे, वह उस दिशा में लगातार काम कर रही है. किसी भी जाति, समुदाय या धर्म के लोगों के साथ कोई अन्याय होने नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट को लेकर ग्वालियर चंबल संभाग में ही सबसे बड़ा आंदोलन हुआ था. यहां से जो आंदोलन शुरू हुआ, उसकी आग पूरे देश भर में फैल गई थी. इतना ही नहीं इसके बाद सवर्ण वर्ग ने लगातार बीजेपी सरकार के नेताओं का विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था. यह विरोध प्रदर्शन इतना तेज था कि विधानसभा चुनाव में ग्वालियर चंबल संभाग में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो गया था.