शाजापुर: 50 से अधिक गांवों में नहीं है एक भी मुक्तिधाम, बारिश में अंतिम संस्कार करने को मजबूर परिजन

ग्रामीणों  ने बताया कि जिले के 50 से अधिक गांवों में एक भी मुक्तिधाम नहीं है, जिसकी वजह से उन्हें मृतकों का अंतिम संस्कार करने में दिक्कत होती है.

शाजापुर: 50 से अधिक गांवों में नहीं है एक भी मुक्तिधाम, बारिश में अंतिम संस्कार करने को मजबूर परिजन
सांकेतिक तस्वीर

मनोज जैन/शाजापुर: शाजापुर जिले के कालापीपल के अंतर्गत आने वाले गांव शेरपुरा में मुक्तिधाम नहीं होने की वजह से डिलीवरी के दौरान मरने वाली महिला का अंतिम संस्कार झमाझम बारिश में किया गया. शव के आस-पास पानी भर जाने की वजह से परिजनों को काफी दिक्कत भी उठाना पड़ा. ऐसे में मुक्तिधाम को लेकर सरकार के दावों की भी पोल खुल गई. 

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ग्रामीणों  ने बताया कि जिले के 50 से अधिक गांवों में एक भी मुक्तिधाम नहीं है, जिसकी वजह से उन्हें मृतकों का अंतिम संस्कार करने में दिक्कत होती है. गर्मियों और ठंड में वे किसी प्रकार अंतिम संस्कार तो कर लेते हैं, लेकिन बारिश के मौसम में उन्हें परिजनों का अंतिम संस्कार करने के में दिक्कत होती है. 

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि तीन साल पहले मुक्तिधाम बनाने के लिए शासकीय जमीन का आवंटन किया गया था और शासन ने ग्राम सचिवों को मुक्तिधाम बनाने का निर्देश दिया था. लेकिन सरपंच और सचिव की मनमानी के चलते आज भी मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पाया. 

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वहीं, मुक्तिधाम को लेकर कालापीपल के सीईओ सिद्धगोपाल वर्मा ने बताया कि 2016-17 में तत्कालिक एसडीएम गिरीश कुमार मिश्रा ने मुक्तिधाम के लिए जमीन आवंटित करवाई थी. लेकिन वहां तक जाने के लिए शासकीय जमीन नहीं है. मुक्तिधाम तक जाने के लिए रास्ता बन सके इसके लिए किसानों से भी बात की गई थी. लेकिन किसानों ने जमीन देने से मना कर दिया. इस वजह से मुक्तिधाम का निर्माण अभी तक नहीं हो पाया है.

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