MP: कांग्रेस ने लगाए संबल योजना में घोटाले के आरोप, शिवराज ने किया पलटवार

जांच में दावा किया गया है कि शिवराज सरकार में चली संबल योजना में 71 लाख अपात्रों को फायदा दिया गया. 

MP: कांग्रेस ने लगाए संबल योजना में घोटाले के आरोप, शिवराज ने किया पलटवार
दावा किया जा रहा है कि इन अपात्र लोगों में से 56 लाख लोग बीजेपी से जुड़े हैं.

भोपाल: मध्य प्रदेश में चौथी बार सत्ता के सिंहासन पर काबिज होने के लिए बीजेपी ने संबल योजना का कार्ड खेला था. चुनावी शतरंज में बीजेपी को मात मिली थी और कांग्रेस का 15 वर्षों से जारी सत्ता का वनवास खत्म हो गया था. वहीं, अब बीजेपी की इस संबल योजना में एक बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है. माना जा रहा है कि इससे बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती है. दरअसल, श्रम विभाग की जांच में संबल योजना के अंतर्गत 6816 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ है. 

जांच में सामने आया है कि शिवराज सरकार में चली संबल योजना में 71 लाख अपात्रों को फायदा दिया गया. दावा किया जा रहा है कि इन अपात्र लोगों में से 56 लाख लोग बीजेपी से जुड़े हैं. वहीं, 35 लाख आयकरदाताओं को गरीब बताकर 200 रुपए में बिजली दी जा रही थी. श्रम विभाग की जांच रिपोर्ट को अब कमलनाथ कैबिनेट में रखा जाएगा. इसके बाद अपात्र लोगों पर कार्रवाई का फैसला किया जाएगा. बता दें कि संबल योजना का लाभ प्रदेश 2.18 करोड़ लोगों को दिया जा रहा था.

वहीं, इस मामले पर श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान की सरकार में यह घोटाला किया गया है. बीजेपी ने 71 लाख अपात्र परिवारों को 6816 करोड़ की बिजली सब्सिडी बांट दी. उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार अपात्रों से बिजली सब्सिडी का पैसा वसूलेगी. उन्होंने कहा कि कैबिनेट बैठक में वसूली और कार्रवाई का प्रस्ताव रखेंगे. 

कांग्रेस के आरोप पर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कमलनाथ सरकार पर भड़क गए. उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार में संबल योजना के लिए तीन क्राइटेरिया तय किए गए थे. आयकरदाता ना हो, सरकारी कर्मचारी ना हो और 5 एकड़ से कम के किसान को फायदा मिलना था. उन्होंने कहा कि क्राइटेरिया का पालन करने वालों से भी कांग्रेस सरकार हक छीन रही है. मदद नहीं देने के लिए कांग्रेस सरकार ऐसे बहाने बना रही है और दोष बीजेपी को दे रही है. 

क्या है संबल योजना
मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना के तहत बीपीएल (BPL) परिवारों को केवल 200 रुपये महीने चुकाकर बिजली इस्तेमाल करने की सुविधा दी जा रही थी.