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झीरमघाटी नक्सली नरसंहार की 6वीं बरसी आज, शहीदों की याद में कांग्रेस मनाएगी शहादत दिवस

वहीं इनमें एक कांग्रेस नेता ऐसे भी थे, जिन्हें नक्सली अपने साथ उठा ले गए थे और इसके बाद खुद-ब-खुद वापस भी छोड़ गए थे. इस हमले के बाद पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर शुरू हो गया कि साल भर तक यह शांत नहीं हो सका था. 

झीरमघाटी नक्सली नरसंहार की 6वीं बरसी आज, शहीदों की याद में कांग्रेस मनाएगी शहादत दिवस
फाइल फोटो

नई दिल्लीः 25 मई 2013 की शाम, जिसने न सिर्फ बस्तर और छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश को हिला कर रख दिया था. इसी दिन बस्तर जिले के दरभा इलाके में स्थित झीरम घाटी में नक्सलियों ने एक भयानक हमले को अंजाम दिया था. जिसमें कांग्रेस के कई बड़े नेताओं समेत कुल 29 लोग मारे गए थे. वहीं इनमें एक कांग्रेस नेता ऐसे भी थे, जिन्हें नक्सली अपने साथ उठा ले गए थे और इसके बाद खुद-ब-खुद वापस भी छोड़ गए थे. इस हमले के बाद पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का ऐसा दौर शुरू हो गया कि साल भर तक यह शांत नहीं हो सका था. 

आज इस घटना को 6 साल बीत गए हैं, लेकिन झीरम घाटी में हुए हत्याकांड के कई रहस्य अनसुलझे हैं. ऐसे में आज भी झीरम घाटी हत्याकांड को लेकर राजनीतिक दल एक दूसरे पर सवाल उठाते रहते हैं. यहां तक की कांग्रेस ने तो इस नक्सली हमले को सुपारी किलिंग तक का नाम दे दिया था. कांग्रेस का आरोप है कि, NIA जांच में षणयंत्र को आधार नहीं बनाया गया. NIA की फाइनल रिपोर्ट बीजेपी सरकार में प्रस्तुत की गई है. कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं कि नेताओं के नरसंहार से किसे फायदा हुआ.

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बता दें कुछ समय पहले तक कहा जा रहा था कि छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में काफी हद तक हालात सुधरे हैं और भाजपा ने अपने कार्यकाल में क्षेत्र से कई नक्सलियों का सफाया किया है, लेकिन जिस तरह से नक्सली बार-बार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, यह इस बात को साफ कर देती है कि यहां अभी भी नक्सलियों की दहशत कम नहीं हुई है.

वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ट्वीट कर झीरमघाटी नरसंहार में मारे गए सभी नेताओं को आज ही के दिन झीरम में हमारे वरिष्ठ नेतागण एक हृदय विदारक षडयंत्र का शिकार हुए थे. उनके न होने से उपजा हुआ 'शून्य' कभी भरा तो न जा सकेगा, लेकिन उनके सपनों को पूरा करने के लिए हम सब कांग्रेस कार्यकर्ता दिन-रात एक कर देंगे. सभी शहीदों को अश्रुपूर्ण नमन.