जापान का सुरू और मध्य प्रदेश का जावद शहर करेंगे एक-दूसरे की मदद, ऐसे निभाएंगे साथ

जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने बताया कि जापान तकनीकी रूप से बहुत विकसित है, लेकिन उसके पास मानव संसाधन की भारी कमी है. जापान के पास कृषि उत्पाद की जरूरतों को पूरी करने लायक जमीन भी नहीं है. भारत के पास जमीन भी है और काबिल नौजवान भी.

जापान का सुरू और मध्य प्रदेश का जावद शहर करेंगे एक-दूसरे की मदद, ऐसे निभाएंगे साथ
जापान के प्रतिनिधि मंडल में शामिल ताकासामा सुजूकी सुरू शहर में पार्षद हैं.

भोपालः इंडो-जापान कल्चरल एवं एंटरप्रेन्योरशिप एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत जापान और भारत में एक बड़ा समझौता किया है. इस समझौते के तहत जापान के कस्बाई शहर सुरू और मध्यप्रदेश के नीमच जिले के कस्बे जावद एक-दूसरे की मदद करेंगे. सुरू जावेद शहर के लोगों को एग्रीकल्चर तकनीक देगा, इस तकनीक के जरिए जापान की जरूरत के कृषि उत्पाद मध्यप्रदेश में पैदा करके जापान को मुहैया कराए जाएंगे. जापान के प्रतिनिधि मंडल ने जावद पहुंचकर यहां की तीन नगर परिषद हूं के साथ यह करार किया.

जावद विधायक ओमप्रकाश सकलेचा ने बताया कि जापान तकनीकी रूप से बहुत विकसित है, लेकिन उसके पास मानव संसाधन की भारी कमी है. जापान के पास कृषि उत्पाद की जरूरतों को पूरी करने लायक जमीन भी नहीं है. भारत के पास जमीन भी है और काबिल नौजवान भी. जापान और भारत के उद्योगपतियों और शिक्षा विशेषज्ञ ने यह तरकीब लगाई कि 2 शहर अगर आपस में एक दूसरे की जरूरतों को पूरी करने का करार करेंगे तो इन्हें काफी मदद मिलेगी. हमने जावत के 15 विद्यार्थियों को जापानी भाषा और तकनीक की ट्रेनिंग देने के लिए 3 हफ्ते के लिए जावद भेजा था. इस दल ने सुरू के बारे में जाना और वहां स्किल डेवलपमेंट की ट्रेनिंग ली. अब यह युवा सुरू या जावद में अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं. हमने इसे जावद से जापान कार्यक्रम नाम दिया है.

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इंडो जापान कल्चरल एंड एंटरप्रेन्योरशिप एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत दोनों शहरों के बीच समन्वय का काम देख रहे हैं उद्योगपति राजेंद्र कुमार कौरा बताते हैं किए दो अलग-अलग शहरों के बीच एक विवाह जैसा कार्यक्रम है. दुनिया में इस कॉन्सेप्ट पर कई जगह काम हो रहा है. मध्यप्रदेश के जावद और जापान के सुरू शहर के बीच प्रदेश में यह पहला करार है. सुरू शहर की जनसंख्या तकरीबन 30 हजार और जावद की आबादी 20 हजार के लगभग है. सुरू शहर खूबसूरत वादियों और हरे-भरे जंगलों का क्षेत्र है. जापान की औसत आयु 100 वर्ष से भी अधिक है, लेकिन युवाओं की तादाद 30% से भी कम है. वहां काम करने के लिए लोग नहीं है.

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फॉरेस्ट एग्रीकल्चर की तकनीक और मैनेजमेंट के लिए मानव संसाधन नहीं होने पर उन्हें ऑटोमेशन टेक्निक का सहारा लेना पड़ता है. बावजूद कई काम मैनुअल ही होते हैं, जिसकी जरूरत जापान पूरी नहीं कर सकता. इन जरूरतों को जावद के युवा पूरा करेंगे, यहां उन उत्पादों की खेती भी की जाएगी जिनकी जरूरत जापान को है. भारत जापान में अच्छे मसालों, काबिल नौजवान के लिए पहचाना जाता है. यहां के व्यवसायियों पर किसानों के लिए भी यह करार फायदा पहुंचाएगा. 

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जापान के प्रतिनिधि मंडल में शामिल ताकासामा सुजूकी सुरू शहर में पार्षद हैं. वे अपने शहर के एमएलए, टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट के प्रिंसिपल और फॉरेस्ट एसोसिएशन के चेयरमैन के साथ यहां पहुंचे हैं. सुजुकी कहते हैं जापान और भारत के बीच कई सांस्कृतिक समानताएं हैं. जैसे भारतवासी नमक का इस्तेमाल करते हैं जापान में हर खाद्य सामग्री में वासाबी का प्रयोग होता है. अदरक नुमा फसल जापान की जरुरत पूरी नहीं कर पाती है, इसे अमेरिका से आयात किया जाता है. अगर यह भारत में पैदा की जाए तो जापान इंपोर्ट कर सकता है.