बैतूल: लाइब्रेरी भवन न होने के चलते सरकारी कॉलेज में दो हजार किताबें खा गई 'दीमक'

यहां पुस्तकालय भवन बनाने का काम बीते चार साल से चल रहा है. बजट आवंटन के अभाव में यह काम डेढ़ साल से रुका पड़ा है.

बैतूल: लाइब्रेरी भवन न होने के चलते सरकारी कॉलेज में दो हजार किताबें खा गई 'दीमक'
कॉलेज प्रबंधन उच्च शिक्षा विभाग को रकम के लिए कई बार लिख चुका है. लेकिन, रकम न मिलने से लाइब्रेरी का सिर्फ ढांचा ही बन सका है.

बैतूल: आर्थिक संकट से गुजर रही कमलनाथ सरकार की खस्ताहालत का असर हर कहीं नजर आ रहा है. ताजा मामला बैतूल का है, यहां के जयवंती हॉक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में 75 लाख की रकम न मिलने से कॉलेज के छात्रों की किताबें दीमक चट कर रही हैं. हालात यह है कि किताबों को अब कॉलेज प्रबंधन जलाने की तैयारी कर रहा है. जरूरतमंद छात्रों को सरकार की बुक बैंक योजना के तहत पढ़ने के लिए दिए जाने का प्रावधान है. इसके लिए सरकारी कॉलेजों में लाइब्रेरियों को हर साल हजारों किताबे आवंटित की जाती हैं. बैतूल के सबसे बड़े सरकारी कॉलेज को भी बीते सालों में हजारों किताबें भेजी गई थीं. लेकिन, रखरखाव की कमी के चलते इन्हें बोरियों में भरकर बेसमेंट में रख दिया गया.

इनमें दो हजार से ज्यादा किताबों को दीमक चट कर गयी है. खास बात यह है कि यहां पुस्तकालय भवन बनाने का काम बीते चार साल से चल रहा है. बजट आवंटन के अभाव में यह काम डेढ़ साल से रुका पड़ा है. कॉलेज प्रबंधन उच्च शिक्षा विभाग को रकम के लिए कई बार लिख चुका है. लेकिन, रकम न मिलने से लाइब्रेरी का सिर्फ ढांचा ही बन सका है. कॉलेज प्रबंधन अब सफाई दे रहा है कि जिन किताबों का उपयोग नही हो रहा था, उन्हें दीमक लगी है. यह किताबें पाठ्यक्रम के लिहाज से पर्याप्त नही थीं. छात्र भी इन्हें पसंद नही कर रहे थे. इसीलिए, किताबों को बोरियों में भरकर रखा गया था. वहीं, लाइब्रेरियन का कहना है कि सभी किताबें 8 से 10 साल पुरानी हैं. नमी के कारण उन्हें दीमक खा गई. अब उन्हें जलाकर नष्ट कर दिया जाएगा.