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दबंगों की मनमानी से बेघर हुआ परिवार, रोटी-रोटी को मोहताज ग्रामीण ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

कभी पंचायत भवन के पीछे तो कभी किसी कॉलोनी में झोपड़ी लगाकर रहने को मजबूर 5 बच्चों के पिता कल्लू खटीक बताते हैं कि काथा गांव के रहने वाले अमित, अतुल और नीरज नाम के यह दबंग लोग उसके परिवार को अक्सर परेशान करते थे

दबंगों की मनमानी से बेघर हुआ परिवार, रोटी-रोटी को मोहताज ग्रामीण ने सरकार से लगाई मदद की गुहार
3 सालों से अपने गांव और घर नहीं जा पाया है कल्लू खटीक का परिवार

प्रदीप शर्मा/भिंडः मध्य प्रदेश के भिंड के काथा गांव में दबंगों की मनमानी के चलते एक परिवार 3 साल से दर-दर की ठोकरें खा रहा है. सड़कों के किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहा यह परिवार प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है, लेकिन इतने समय बीतने के बाद भी उसे अपने घर की जगह सिर्फ आश्वासन ही मिला है. दरअसल, गांव के दबंगों ने इस गरीब परिवार को गांव से ही निकाल दिया है और आज यह परिवार रौन कस्बे में दर-दर की ठोकरें खा रहा है. 

कभी पंचायत भवन के पीछे तो कभी किसी कॉलोनी में झोपड़ी लगाकर रहने को मजबूर 5 बच्चों के पिता कल्लू खटीक बताते हैं कि काथा गांव के रहने वाले अमित, अतुल और नीरज नाम के यह दबंग लोग उसके परिवार को अक्सर परेशान करते थे धीरे-धीरे हालात यह बने कि दबंगों ने कल्लू खटीक के पूरे परिवार को गांव से निकाल दिया. आज कल्लू अपने परिवार के साथ रोन कस्बे में झोपड़ी में रहने को मजबूर है और किसी तरह अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं.

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पीड़ित परिवार ने कई बार पुलिस में शिकायत की तो कई बार प्रशासन के आला अधिकारी कलेक्टर और एसपी से भी न्याय की गुहार लगाई, लेकिन आज तक आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला. रोन कस्बे के ही रहने वाले मोहन कुशवाहा ने अपनी निजी जमीन पर रहने की जगह दे दी है. जहां पर परिवार झोपड़ी डाल कर रह रहा है. पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि उनके पास दोनों पक्ष के लोग आवेदन लेकर आये थे, मामले की जांच वरिष्ठ अधिकारियों से कराई जा रही है. जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई शुरू की जाएगी.

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वहीं परिवार को अब यह उम्मीद नहीं है कि वह कभी अपने गांव में अपने घर में वापस जा पाएंगे. अब यह परिवार दूसरों के रहमों करम पर ही रह रहा है. इस पीड़ित परिवार की प्रशासन से सिर्फ एक ही मांग रह गई है कि अगर उनका घर नहीं दिला पा रहे तो कम से कम कुछ सरकारी मदद ही मिल जाए. इतने आवास प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवंटित होते हैं, क्या उन्हें यह आवास आवंटित किया जा सकता है. कल्लू की सबसे बड़ी बेटी स्नेहा भी अब स्कूल नहीं जा पाती. स्नेहा कहती है कि घर में कुछ खाने के लिए नहीं है स्कूल जाने की व्यवस्था कैसे हो.