मध्य प्रदेश के इन गांवों में भूख से मजबूर हुआ गरीब, चंद रुपयों के लिए गिरवी रख रहा है राशनकार्ड

ग्रामीणों ने जो राशनकार्ड गिरवी रखे हैं उसकी सहायता से दलाल 1 रुपये किलो की दर से राशन खरीदते हैं और फिर इससे अपना काला धंधा चलाते हैं.

मध्य प्रदेश के इन गांवों में भूख से मजबूर हुआ गरीब, चंद रुपयों के लिए गिरवी रख रहा है राशनकार्ड

शिवपुरीः मध्य प्रदेश के शिवपुरी में कुछ गांव ऐसे हैं जहां के लोगों को गरीबी के चलते अपना राशनकार्ड भी गिरवी रखना पड़ रहा है. गांव में गरीबी और भुखमरी का आलम कुछ ऐसा है कि कई लोगों को दो-दो दिनों में खाने को मिलता है, ऐसे में बच्चों की भूख के चलते मजबूर ग्रामीणों को अपना राशनकार्ड गिरवी रखकर खाने का इंतजाम करना पड़ता है. बता दें यह हाल है शिवपुरी के गांव मजेराताल और गांव मजेरा की आदिवासी बस्ती का, जहां बच्चों को भरपेट खाना ना मिल पाने पर यह बच्चे शारीरिक और मानसिक तौर पर बीमार होते जा रहे हैं.

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वहीं बच्चों की भूख देखकर मां-बाप भी अंत्योदय गरीबी रेखा का राशन कार्ड गिरवी रख देते हैं, ताकि बच्चों के लिए दो जून की रोटी की व्यवस्था कर सकें. बता दें ये कोई एक परिवार की बात नहीं बल्कि पूरा मजेराताल आदिवासी अपने अपने राशनकार्ड गिरबी रखता है और अपना और अपने परिवार का पेट भरता है. बता दें गांव के इन लोगों को अंत्योदय गरीबी रेखा योजना के तहत राशनकार्ड पर 1 रुपये किलो की कीमत पर राशन मिल सकता है, लेकिन अधिकतर ग्रामीणों ने अपना राशनकार्ड गिरवी रख दिया है, जिसके चलते अब इनके लिए 1 रुपये का राशन खरीदना भी मुश्किल हो गया है.

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शिवपुरी से महज 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव मजेरा, मजेरताल आदिवासी बस्ती में जब जी मीडिया की टीम पहुंची तो आदिवासी बहुमूल्य समाज के लोग अपने राशनकार्ड को जरूरत पड़ने पर गिरवी रखने की बात सामने आई. जब मीडिया ने गांव में आदिवासियों से इस बारे में पूछा तो ज्यादातर आदिवासियों के अंत्योदय राशनकार्ड गिरवी रखने की बात सामने आई. बता दें ग्रामीणों ने जो राशनकार्ड गिरवी रखे हैं उसकी सहायता से दलाल 1 रुपये किलो की दर से राशन खरीदते हैं और फिर इससे अपना काला धंधा चलाते हैं.