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इस पुलिसवाले ने बच्चों के नाम की जिंदगी, बाल मजदूरी का दंश झेलने वाले बच्चों का बना 'भगवान'

ये सफर शुरू हुआ चार बच्चों से, जब महेश को सड़क किनारे चार बच्चे मिले, जिनके पास ना खाने के पैसे थे ना पढ़ने के, और उन्हीं बच्चों ने महेश की ज़िंदगी बदल दी.

इस पुलिसवाले ने बच्चों के नाम की जिंदगी, बाल मजदूरी का दंश झेलने वाले बच्चों का बना 'भगवान'
फाइल फोटो

रायपुर/ रजनी ठाकुर: आज विश्व बाल मजदूर निषेध दिवस है. हमें अक्सर अपने आसपास ऐसे मासूम दिखाई देते हैं, जो सपने देखने और पढ़ने लिखने की उम्र में मजदूरी कर रहे होते हैं. ऐसे बच्चों के लिए हम अफसोस के सिवा कुछ नहीं कर पाते, लेकिन आज हम आपको मिलवाएंगे एक ऐसे पुलिसवाले से, जिसने अपनी जिंदगी इन्हीं बच्चों के नाम कर दी है. महेश नेताम जो पुलिस आरक्षक हैं और बाल मजदूरी का दंश झेल चुके बच्चों की जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए ईमानदार कोशिश कर रहे हैं.

ये सफर शुरू हुआ चार बच्चों से, जब महेश को सड़क किनारे चार बच्चे मिले, जिनके पास ना खाने के पैसे थे ना पढ़ने के, और उन्हीं बच्चों ने महेश की ज़िंदगी बदल दी. चार बच्चों से शुरू हुए इस सफर में आज सैकड़ों बच्चे शामिल हो गए हैं. इनमें वो बच्चे भी हैं, जो कभी बाल मजदूर रहे हैं, साथ ही वो बच्चे भी जिन्होंने अपने माता पिता को खो दिया है और तंगहाली में जी रहे हैं. 

इन बच्चों को महेश बुनियादी पढ़ाई, कंप्यूटर, स्पोर्ट्स की भी ट्रेंनिंग देते हैं. साथ ही फिजिकल फिटनेस बढ़ाने के लिए रनिंग, एक्सरसाइज आदि भी कराया जाता है. सुबह और शाम का वक्त तय है, ताकि ये बच्चे घर की जिम्मेदारी निभाने के साथ ही पढ़ाई भी कर पाएं. 

हालांकि महेश रायपुर में बतौर पुलिस आरक्षक पदस्थ हैं, ऐसे में खुद की आमदनी भी बेहद सीमित है, लेकिन महेश के जज़्बे को देखते हुए दोस्त और जानने पहचानने वाले भी मदद के हाथ बढ़ाते हैं, और इस तरह ये कारवां चल रहा है. जिन्दगी के स्याह रंग देख चुके इन बच्चों की ज़िंदगी में नया सवेरा लाने की इस कोशिश को हमारा भी सलाम.