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टीकमगढ़ कलेक्टर का फरमान, कर्मचारी 9 बजे से पहले घर गए तो कटेगी पूरे दिन की सैलरी

लिपिकों के हड़ताल पर जाने से पूरा काम लंबित पड़ा है. ऐसे में जो भी लिपिक हड़ताल पर थे वह रात 9 बजे तक रुककर काम निपटाएंगे और 9 बजे के बाद ही घर जाएंगे.

टीकमगढ़ कलेक्टर का फरमान, कर्मचारी 9 बजे से पहले घर गए तो कटेगी पूरे दिन की सैलरी
प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्लीः टीकमगढ़ कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में कार्यरत उन सभी बाबुओं को सुबह 10:30 से रात 9 बजे तक काम करने का आदेश दिया है जिन्होंने 25 जुलाई से 2 अगस्त तक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था. कलेक्टर ने जारी आदेश में साफ कहा है कि कोई भी बाबू रात 9 बजे से पहले घर नहीं जाएगा. अगर कोई भी बाबू रात 9 बजे से पहले घर जाने की गलती करेगा तो उसका पूरे दिन का वेतन काट लिया जाएगा. वहीं जब जिला कलेक्टर से इस संबंध में कुछ भी जानने की कोशिश की गई तो कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया.

25 जुलाई से 2 अगस्त तक हड़ताल पर थे लिपिक
दरअसल, पूरा मामला 25 जुलाई से 2 अगस्त के बीच का है. जब लिपिक वर्ग के बाबुओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और अपने संगठन के प्रांतीय आह्वान पर कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठ गए. बता दें सभी लिपिक वर्ग के कर्मचारी लिपिक वर्ग विसंगति की मांग सहित विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन कर धरने पर बैठे थे. बाबुओं द्वारा यह धरना 25 जुलाई से 2 अगस्त तक जारी रहा. जिसके चलते जिला कार्यालय के सभी कामकाज ठप्प हो गए.

7 दिन बीतने के बाद भी वापस नहीं लिया फरमान
2 अगस्त तक हड़ताल करने के बाद जैसे ही लिपिक जैसे ही काम पर लौटे तो कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने सभी के खिलाफ तुगलकी फरमान जारी कर दिया. जिसमें कहा गया है कि लिपिकों के हड़ताल पर जाने से पूरा काम लंबित पड़ा है. ऐसे में जो भी लिपिक हड़ताल पर थे वह रात 9 बजे तक रुककर काम निपटाएंगे और 9 बजे के बाद ही घर जाएंगे. वहीं फरमान को 7 दिन बीत गए हैं, लेकिन कलेक्टर साहब ने अब तक अपना फरमान वापस नहीं लिया है. जिससे कर्मचारियों को खासी परेशानी हो रही है.

 रात 09 बजे तक संचालित किया जा रहा है कार्यालय
कलेक्टर के आदेश के बाद से ही अब टीकमगढ़ जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय रात 09 बजे तक संचालित किया जा रहा है. वहीं कलेक्टर के इस आदेश को लिपिक वर्ग तानाशाह रवैया अपनाने की बात कह रहा है. लिपिकों के मुताबिक कलेक्टर द्वारा दबाव बनाकर जबरदस्ती काम लिया जा रहा है. कलेक्टर रोजाना कर्मचारियों से 4 घंटे अधिक काम ले रहे हैं, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है. 

भूखे पेट रहकर जबरदस्ती ऑफिस में बैठना पड़ रहा है
बाबुओं का कहना है कि सुबह 10 बजे कार्यालय आने के बाद भी भूखे पेट रहकर जबरदस्ती ऑफिस में बैठना पड़ रहा है. कलेक्टर साहब ने आदेश में कहा था कि रात्रि के समय आप अपने अधूरे पड़े काम को निपटाएं, लेकिन काम निपट जाने के बाद भी हमें ऑफिस में बैठना पड़ रहा है, जिससे हम काफी परेशान हैं.