एक सास ऐसी भी: 11 बहुओं ने सास को ही माना भगवान, सोने के गहने पहनाकर रोज करती हैं पूजा

बिलासपुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर रतनपुर गांव है. यहां शिवप्रसाद तंबोली 77 वर्ष का 39 सदस्यों वाला संयुक्त परिवार है. जिनकी 11 बहुएं हैं. 

एक सास ऐसी भी: 11 बहुओं ने सास को ही माना भगवान, सोने के गहने पहनाकर रोज करती हैं पूजा
सास गीता देवी की मूर्ति.

बिलासपुर/ शैलेन्द्र सिंह: बिलासपुरः भारत में सास बहू के प्रचलित किस्सों में सास की छवि को सदैव नकारात्मक दिखाया जाता है और बहू को सास के अत्याचार सहने वाली बेचारी के रूप में. लेकिन हर सास अत्याचारी और हर बहू बेचारी हो ऐसा नहीं होता. ऐसी अनगिनत कहानियां हैं जिनमें सास ने बहू को अपनी बेटी माना है और बहू ने सास को मां. 

साह और बहुयों के बीच प्यार की एक कहानी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से भी सामने आई है. यहां एक ऐसा परिवार है जिनकी बहुओं को अपनी सास से इतना प्रेम था कि उनके निधन के बाद उनकी यादों को संजोए रखने के लिए 11 बहुओं ने सास का मंदिर बनवा लिया. इतना ही नहीं वे रोज उनकी पूजा करने के साथ आरती भी उतारती हैं.

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महीने में एक बार सभी 11 बहुएं अपनी सास के मंदिर के सामने बैठकर भजन कीर्तन करतीं है. सास बहुओं के बीच इस प्रेम को मिसाल के तौर पर देखा जा रहा है, जो समाज में इस रिश्ते को लेकर बनी भ्रांति को तोड़ने के लिए एक प्रेरणा है. 

बहु नहीं बेटी की तरह चाहा
बिलासपुर जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर बिलासपुरण्कोरबा मार्ग पर रतनपुर गांव है. यहां शिवप्रसाद तंबोली 77 वर्ष का 39 सदस्यों का संयुक्त परिवार है. इस परिवार में 11 बहुएं हैं. बहुओं की सास गीता देवी का 2010 में निधन हो गया. जब वह जीवित थीं तो बहुओं को अपनी बेटियों की तरह प्यार करती थीं.

उन्होंने अपनी बहुओं को पूरी आजादी दे रखी थी. सास गीता देवी को भी ये संस्कार अपनी सास से ही मिले थे. गीता देवी के गुजर जाने के बाद उनकी 11 बहुओं ने अपनी सास का मंदिर बनवाया. मंदिर में गीता देवी की मूर्ति लगी है जिसका श्रृंगार सोने के गहनों से हुआ है. बहुएं रोजाना मंदिर में पूजा-आरती भी करती हैं. 

कुछ इस प्रकार है संयुक्त परिवार
सास गीता की तीन बहुएं हैं. इनमें बेटे संतोष की पत्नी ऊषा (51वर्ष), प्रकाश की पत्नी वर्षा (41 वर्ष) और प्रमोद की पत्नी रजनी (37 वर्ष) शामिल हैं. संयुक्त परिवार में गीता देवी के देवर केदार की पत्नी कलीबाई (65 वर्ष), कौशल की पत्नी मीराबाई (31 वर्ष) पुरुषोत्तम की गिरिजा बाई (55 वर्ष) और सुभाष की अंजनी (50 वर्ष) भी हैं. बड़ी जेठानी गीता ने कभी उन्हें देवरानी नहीं माना. बल्कि बहनों की तरह ही दुलार किया. बहुओं के ससुर शिवप्रसाद को मिलाकर आपस में वह पांच भाई हैं. शिव प्रसाद ही सबसे बड़े हैं.

 

दूसरे नंबर पर केदारनाथ, तीसरे कौशलनाथ हैं जिनका निधन हो चुका है. बाकी मुन्ना व सुभाष भी व्यवसाय करते हैं. तीनों परिवारों का जिम्मा वे खुद ही संभालते हैं. केदारनाथ के चार, कौशल के दो, पुरुषोत्तम के दो बेटे हैं. भाइयों की पत्नियों को मिलाकर 11 बहुएं तंबोली परिवार की आधार स्तंभ हैं.

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बहुएं पढ़ी लिखी, हर चीज की आजादी
तंबोली परिवार की सभी बहुएं पढ़ी लिखी हैं. सभी पोस्ट ग्रेजुएट हैं. वे पुरुषों के कारोबार का हिसाब किताब रखने में मदद करती हैं. शिव प्रसाद रिटायर होने के बाद पान की दुकान चलाते हैं. तंबोली परिवार के पास होटल के अलावा दो किराना की दुकानें, दो पान की दुकानें और साबुन की फैक्टरी है. उनकी 20 एकड़ जमीन है, जिसमें खेती करते हैं. तंबोली परिवार की एक ही रसोई है. यहां बहुएं मिलकर खाना पकाती हैं.

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