छत्तीसगढ़ के इस जिले में दिखा दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव, जानिए इसकी खासियत

छत्तीसगढ़ में यूरेशियन ओटर यानि दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव देखने को मिला है. 

छत्तीसगढ़ के इस जिले में दिखा दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव, जानिए इसकी खासियत
दुर्लभ प्रजाति का ऊदबिलाव

नीलम पड़वार/कोरबाः आमतौर पर ठंडे प्रदेशों में मिलने वाला यूरेशियन ओटर मतलब ऊदबिलाव छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में देखने को मिला है. दुर्लभ प्रजाति का यह खूबसूरत बेबी ऊदबिलाव एक युवक के पास था. युवक का कहना है कि उसने इस ऊदबिलाव को 100 रुपए में खरीदा था. 

इस तरह हुआ मामले का खुलासा 
मामले का खुलासा तब हुआ जब युवक ऊदबिलाव को लेकर एक अन्य साथी के साथ मिलकर पेट शॉप पहुंचा और ऊदबिलाव को डॉग बताकर उसके लिए दवाई मांगने लगा. ऐसे में मेडिकल संचालक को संदेह हुआ तो उसने युवक से डॉग की ब्रीड के बारे में पूछा लेकिन युवक जवाब नहीं दे पाया. जिसके बाद मेडिकल संचालक ने इसकी सूचना एनिमल रेस्कयू टीम को दे दी. जिसके बाद एनिमल रेस्क्यू टीम ने समय रहते ऊदबिलाव को युवक से लेकर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया. अब अधिकारी इस मामले की पड़ताल में जुट गए है की क्या बेबी ऊदबिलाव किसी नदी नाले में बिछाए जाल में फंसने से मिला या उसकी तस्करी की गई है. 

तस्करी की संभावना 
कोरबा की डीएफओ प्रियंका पांडेय ने खुद माना है कि ये मामला ऊदबिलाव के तस्करी से जुड़ा भी हो सकता है. बताया जा रहा है कि ऊदबिलाव की चमड़ी से कई प्रकार के प्रोडक्ट तैयार होते है. जिसके कारण इसकी काफी डिमांड होती है. ऐसे में किसी आम आदमी के हाथों में दुर्लभ प्रजाति के ऊदबिलाव का मिलना कई सारे सवालों को जन्म दे रहा है. फिलहाल मामले की जांच की जा रही है. डीएफओ ने बताया कि इससे पहले कोरबा में स्मूथ कोटेड ओटर मिला है जो काले रंग का होता है. लेकिन पहली बार यूरेशियन ओटर मिला है. उन्होंने कहा कि रेप्टाइल केयर एंड रेस्क्यूअर सोसायटी एवं छत्तीसगढ़ विज्ञानसभा कोरबा इकाई के सचिव अविनाश यादव और उनकी टीम के अन्य सदस्य वैज्ञानिक मार्गदर्शन में इस ऊदबिलाव की देखरेख कर रहे हैं. जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाएगा उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा. 

सबसे अधिक संकटग्रस्त प्रजातियों में से एक है यह ऊदबिलाव 
अंतराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने यूरेशियन ओटर ऊदबिलावों को कमजोर वर्ग के तहत सूचीबद्ध किया है. यूरेशियन ओटर को संकटग्रस्त प्रजातियों में माना जाता है. ऊदबिलाव आईयूसीएन के नियर थ्रेटड मूल्यांकन में एहतियाती सूची से अधिक है. इस प्रजाति के संरक्षण कार्यों को बनाए रखने की आवश्यकता है. इसके अलावा इस बात को लेकर अभी भी चिंता बनी हुई है कि एशिया में के कुछ हिस्सों में अवैध शिकार में बढ़ोतरी हुई है. 

यूरेशियन ओटर की खासियत 
कोरबा जिले में मिले इस यूरेशियन ओटर की अपनी कुछ खासियते हैं. यूरेशियन ओटर झील, नदियों जैस स्थानों पर रहता है. गर्मियों के दिनों में ये हिमालय में 3669 मीटर तक चढ़ जाते हैं. जलीय जीवन शैली वाले यह जीव लड़ाई के दौरान बिल्ली की तरह आवाज निकालते हैं. 

ऊदबिलाव की मौजूदगी कोरबा जिले के लिए गौरव 
वैसे तो छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला जैव विविधता से परिपूर्ण है. जिले के जंगल और पहाड़ियों में विभिन्न प्रजाति के जीव मौजूद है. चाहे किंगकोबरा की बात हो या फिर पैंगोलिन.  लेकिन कभी-कभी विलुप्त और दुर्लभ जीव जंतु भी यहां दिख जाते हैं. वहीं जिलें में यूरेशियन ओटर का मिलना अपने जिले के लिए काफी अच्छी खबर माना जा रहा है. क्योंकि आमतौर पर ठंडे इलाको में पाया जाना वाला ओटर जिले में कई बार मिला है. ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि जंगल में ऊदबिलाव की तादात में बढ़ोत्तरी हुई है. 

शिकारियों से संरक्षण की चुनौती
ऊदबिलाव दुर्लभ प्रजाति का जीव है. जानकार बताते है कि इसकी कोमल चमड़ी की कीमत लाखों में है. यही वजह है कि ऊदबिलाव का शिकार होता है. कई बार ओटर के मिलने से शिकारी भी सक्रिय हो गए होंगे. 100 रुपये में खरीदी बिक्री के इस मामले में ओटर के तस्करी के मामले को और हवा दे दी है. ऐसे में ऊदबिलाव को शिकारियों से बचाना भी विभाग के लिए बड़ी चुनौती है.

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