मंत्रिमंडल के बाद अब निगम मंडलों में हो सकता है ग्वालियर चंबल का दबदबा, इन नेताओं को मिल सकता है मौका

निगम मंडलों में होने वाली नियुक्तिों में भी ग्वालियर चंबल अंचल का दबदबा देखने को मिल सकता है.

मंत्रिमंडल के बाद अब निगम मंडलों में हो सकता है ग्वालियर चंबल का दबदबा, इन नेताओं को मिल सकता है मौका
फाइल फोटो

शैलेन्द्र सिंह भदौरिया/ग्वालियरः हाल ही में बीजेपी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के मध्य प्रदेश दौरे को लेकर एक बार फिर निगम मंडलों में नियुक्ति की फिर चर्चा शुरू हो गई है. भले ही निगम मंडल की नियुक्तियां को लेकर अंतिम मुहर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से लगनी हो लेकिन भोपाल के साथ-साथ ग्वालियर चंबल संभाग में निगम मंडल की नियुक्ति को लेकर सरगर्मियां तेज है. 

बीजेपी के तमाम दावेदार नेताओं को लगता है कि मंत्रिमंडल की तरह निगम मंडल की नियुक्तियों में भी ग्वालियर चंबल संभाग का दबदबा होगा, उसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि वर्तमान समय में बीजेपी के तीन बड़े नेता अंचल से आते हैं चाहे वह प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा हो, राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया हो या फिर केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर. ऐसे में राजनीतिक जानकार कहते हैं कि तीनों ही अपने-अपने कार्यकर्ताओं को निगम मंडल में बैठाने को लेकर व्यवस्था करने में लगे हुए हैं. हालांकि किसे निगम मंडल में जगह मिलेगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन फिलहाल ग्वालियर चंबल संभाग में इसको लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है. 

निगम मंडलों पर बीजेपी की राय
निगम मंडलों में नियुक्तियों को लेकर बीजेपी के पूर्व विधायक घनश्याम पिरौनिया का कहना है कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि मंत्रिमंडल की तरह निगम मंडल में भी ग्वालियर चंबल संभाग का दबदबा रहेगा. हालांकि इसका निर्णय आलाकमान को लेना है भले ही तीन बड़े नेता यहां से आते हैं लेकिन उन्हें पूरी उम्मीद है कि आपसी सामंजस के साथ यह नियुक्तियां की जाएंगी.

आसान नहीं होगी सीएम शिवराज की राहः कांग्रेस 
वहीं इसको लेकर कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह तोमर का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान अपने पिछले कार्यकाल में कई निगम मंडलों में नियुक्तियां नहीं कर पाए थे. उसके पीछे कहीं ना कहीं गुटबाजी जी बड़ा कारण थी और अब तो सिंधिया के आने के बाद गुटबाजी और बढ़ गई है, ऐसे में निगम मंडल में नियुक्तियां देना बीजेपी के लिए आसान रहा नहीं है, हालांकि यदि नियुक्तियां होती है तो निश्चित तौर पर सिंधिया समर्थकों का दबदबा इस अंचल में देखने को मिल सकता है. 

ग्वालियर-चंबल से इन नेताओं को मिल सकती है निगम मंडलों में नियुक्तियां 

इमरती देवी, पूर्व मंत्री, सिंधिया समर्थक

गिर्राज दंडौतिया, पूर्व मंत्री, सिंधिया समर्थक और ब्राह्मण होने के नाते वीडी शर्मा का भी मिल सकता है साथ

मुन्नालाल गोयल, पूर्व विधायक, सिंधिया समर्थक और वैश्य वर्ग को खुश करने के लिए दिया जा सकता है मौका

एदल सिंह कंषाना, पूर्व मंत्री, अंचल में आगामी समय मे होने वाले चुनाव को लेकर गुर्जर समाज को साधने के लिए मिल सकता है मौका

घनश्याम पिरौनिया, पूर्व विधायक, 2018 के चुनाव में टिकिट कटा था लेकिन संघ की पसंद

रुस्तम सिंह, पूर्व मंत्री, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह का साथ और कद्दावर नेता, पहले पंचायत और स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल चुके है, पिछड़ा वर्ग आयोग में भी संभाल चुके हैं जिम्मेदारी

रणवीर जाटव, पूर्व विधायक, सिंधिया समर्थक, युवा चेहरा और दलित कोटे से आते हैं. 

माया सिंह, पूर्व मंत्र, महल की करीबी, संघ और पार्टी आलाकमान में पकड़

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