जबलपुर हाई कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा- हिन्दी भाषा को Twitter पर मान्यता दिलाने के​ लिए क्या किया?

 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने ट्विटर पर हिंदी भाषा को मान्यता दिलाने की याचिका पर केन्द्र सरकार से पूछा है कि इस संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं. 

जबलपुर हाई कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा- हिन्दी भाषा को Twitter पर मान्यता दिलाने के​ लिए क्या किया?
सांकेतिक तस्वीर

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच ने ट्विटर पर हिंदी भाषा को मान्यता दिलाने की याचिका पर केन्द्र सरकार से पूछा है कि इस संबंध में क्या कदम उठाए गए हैं. जबलपुर हाई कोर्ट ने इस मामले में केन्द्र सरकार को 24 मार्च तक जवाब देने का निर्देश दिया है. यह जनहित याचिका बालाघाट की लांजी विधानसभा से पूर्व विधायक किशोर समरीते की ओर से दायर की है.

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विदेशों में ट्रांसलेट कर दिखाए जाते हैं ट्वीट
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता शिवेन्द्र पाण्डेय और सुयश प्यासी ने तर्क दिया कि भारत में टि्वटर पर हिन्दी में किए जाने वाले ट्वीट तो हिन्दी भाषा में दिखते हैं. लेकिन विदेशों में हिन्दी भाषा के ट्वीट को अंग्रेजी में ट्रांसलेट करके नहीं दिखाया जाता है. इस कारण ज्यादातर हिंदी के ट्वीट्स का अर्थ ऑटो ट्रांसलेट के कारण बदल जाता है. इसको रोकने के लिए ट्विटर पर हिंदी भाषा को मान्यता दिलाना जरूरी है. ऐसा होने के बाद हिंदी के ट्वीट को अंग्रेजी या किसी देश की भाषा में सही रूप से ट्रांसलेट कर दिखाया जा सकेगा.

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ट्विटर के इस्तेमाल में भारत तीसरे नंबर पर
इस याचिका में कहा गया है कि ट्विटर ने विश्व की 9 भाषाओं को मान्यता दी है. लेकिन भारत में सर्वाधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा​ हिंदी को मान्यता नहीं दी गई है. याचिकाकर्ता ने इस संबंध में केन्द्र सरकार को पत्र भी लिखा है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इस याचिका में यह भी बताया गया है कि ट्विटर उपयोग करने के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर है. इसको देखते हुए भी ट्विटर पर हिन्दी भाषा को मान्यता दिलाया जाना जरूरी है.

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